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तहसील दिवस आओ, शिकायत लगाओ और घर जाओ

Banda Updated Wed, 22 Aug 2012 12:00 PM IST
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बांदा। तहसील दिवस बहुत से फरियादियों के लिए बेमानी साबित हो रहे हैं। दूर-दराज से आने वाले फरियादियों के प्रार्थनापत्रों पर कार्रवाई के नाम पर संबंधित विभाग को लिखित निर्देश देने तक सीमित हो गया है। काम न होने पर फरियादी चार-पांच बार आने के बाद खुद थक हारकर घर बैठ जाते हैं। ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में ऐसे ही मायूस हो चुके कई फरियादी सदर तहसील दिवस में दिखे। सभी ने कहा कि अब तो तहसील दिवस महज फर्ज अदायगी के लिए होते हैं। तमाम भुक्तभोगियों का कहना था कि हाल ऐसे हैं तहसील दिवस आओ, शिकायत लगाओ और घर जाओ लेकिन समस्याएं जस की तस रहती हैं।
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शासन ने गांवों में जमीन पर कब्जे, पुलिस में सुनवाई नहीं होने, निर्धारित धनराशि जमा करने के बावजूद बिजली कनेक्शन नहीं दिए जाने, संबंधित अर्हता पूरी करने के बावजूद योजनाओं का लाभ नहीं दिए जाने या फिर अन्य छिटपुट शिकायतों के निस्तारण के लिए तहसील दिवसों का आयोजन शुरू किया था ताकि यही छोटे-मोटे विवाद आगे चलकर बड़ी घटना का रूप न ले सकें। अधिकारियों को भी तहसील दिवस में मौजूद रहकर शिकायतों का वरीयता से निस्तारण करने के आदेश मिलते रहते हैं। बावजूद इसके तहसील दिवस अपने उद्देश्यों पर सफल नहीं हो रहे हैं। समस्याओं के निस्तारण में अधिकारियों के रुचि नहीं लेने से फरियादी बैरंग लौट रहे हैं।
‘अमर उजाला’ की पड़ताल में मंगलवार को तहसील दिवस की कलई खुल गई। शहर में बिजली खेड़ा से अपनी फरियाद लेकर चौथी बार तहसील दिवस में आए संतोषदास पुजारी मायूस थे। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में लगा हैंडपंप कई माह से खराब है। श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए घर से पानी लेकर आना पड़ता है। कई बार शिकायत की लेकिन प्रार्थना पत्रों में संबंधित विभाग को निर्देशित कर दिया जाता है और वहां जाने पर आज-कल आने की बात कहकर टरका दिया जाता है।
बान बाबा का पुरवा (नगनेधी) से आए प्रहलाद पुत्र दुर्गा की पीड़ा है कि उसका इंदिरा आवास अधूरा पड़ा है। आवास के सामने दबंगों ने शौचालय का टैंक बना लिया है। गंदा पानी उसके घर में भरता है। अपनी पीड़ा लेकर वह अतर्रा व जिलाधिकारी समेत सदर तहसील के चक्कर लगा रहा है।
इसी प्रकार शंकर नगर की रहने वाली सरोज, लल्ली धुरिया व पार्वती लेखपालों से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि मजदूरी कर परिवार का पेट पालती हैं। छात्रवृत्ति के लिए आय व जाति प्रमाणपत्र बनवाने को वह माह भर से चक्कर लगा रही हैं। लेखपाल को पैसा नहीं देने पर उसने मनमानी रकम बढ़ाकर आय चढ़ा दी है। तहसील दिवस में शिकायत की तो अधिकारियों ने बाद में आना की बात कहकर टरका दिया।

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