बालू और मत्स्य पालन पट्टा शासनादेश बहाल हो

Banda Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
बांदा। लोधी, निषाद, मल्लाह, ढीमर बिरादरी के सम्मेलन में बालू व मत्स्य पालन पट्टे दिए जाने की मांग जोरशोर से उठाई गई। इस मौके पर नेताओं का कहना था कि पूर्व में जारी शासनादेश खत्म किए जाने से उपरोक्त बिरादरी के तमाम लोग भुखमरी की हालत में पहुंच गए हैं। यहां तक कि परेशान होकर आत्महत्या तक हो रही हैं।
चिल्ला रोड स्थित मवई सर्किट हाउस में रविवार को आयोजित सम्मेलन में पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के कार्यकाल में सीताराम निषाद खनिज मंत्री थे। तत्कालीन सरकार ने शासनादेश जारी कर कहा था कि बालू खनन के पट्टे सिर्फ निषाद, लोधी, मल्लाह, ढीमर आदि जातियों को दिए जाएं। नदियों में फेरी घाट व तालाब, झील, जलाशयों में मछली पालन और आखेट के पट्टे भी इन बिरादरियों को देने को कहा गया था। 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने भी महासभा द्वारा लखनऊ में आयोजित सम्मेलन में इन बिरादरी के लोगों को बालू खनन व मत्स्य पालन पट्टे में प्राथमिकता देने को कहा था। यह शासनादेश समाप्त होने के बाद अब उक्त जातियों की आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है।
डा.अच्छेलाल निषाद ने कहा कि जल बिरादरी के लोग भुखमरी की कगार में पहुंच गए हैं। आर्थिक तंगी के चलते अब आत्महत्याएं हो रही हैं। व्यापार व सरकारी नौकरियों में इन जातियों का प्रतिनिधित्व नाम मात्र है। उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से अपने पिता के पद चिन्हों पर चलते हुए पूर्व शासनादेश को बहाल करने की मांग की। आम सहमति से तैयार किए गए मांग पत्र में निषाद, लोधी, मल्लाह, ढीमर, बिंद समेत 13 मछुवा समुदाय की जातियों को बालू खनन के पट्टे, मत्स्य पालन के लिए तालाबों के आवंटन में प्राथमिकता, पर्यावरण संतुलन और सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक मशीनों से बालू खनन में रोक लगाने, पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना खनन पर रोक, किसानों को ट्रैक्टर ट्राली से बालू ले जाने पर रायल्टी में 50 फीसदी छूट और कुशवाहा, कुम्हार, पाल समेत उपरोक्त जातियों को अति पिछड़ा वर्ग का दर्जा देकर 15 फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग शामिल है। महासभा राष्ट्रीय महासचिव पूर्व विधायक रामकुमार (उन्नाव), चौधरी लोटनराम, मुन्नीलाल निषाद (हमीरपुर), प्रमोद रैकवार (महोबा), कैलाशनाथ निषाद, आत्माराम रैकवार, रामलखन राजपूत आदि ने संबोधित किया।

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