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होली व ईद जैसा माहौल था

Banda Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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बांदा। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ उस समय बांदा में पर्व जैसा उत्साह का माहौल था। सभी वर्गों के लोग घर-घर जाकर एक दूसरे के गले मिलकर अंग्रेजों के भारत छोड़ने की बधाई दे रहे थे।
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अलीगंज (सेठ जी का हाता) के बाशिंदे 85 वर्षीय रामप्रताप द्विवेदी वर्ष 1947 की याद ताजा करते हुए कहते हैं कि गज्जू खां को बांदा का गांधी कहा जाता है। 15 अगस्त की सुबह हर जगह चर्चा थी कि अब देश अंग्रेजों से पूरी तरह आजाद घोषित कर दिया गया है। तब उन्होंने गज्जू खां से इसकी पुष्टि की। फिर क्या था पूरा परिवार उनका खुशियों से उछल पड़ा। महिलाओं व पुरुषों ने अपने-अपने तरीके से आजादी का जश्न मनाया था। वहीं स्वराज कालोनी के निवासी कल्लू पाठक (82) अपनी जुबानी 15 अगस्त की खुशियां बया करते हैं। कहते हैं उस समय वह आगरा में थे। तब फोन सुविधा नहीं थी और नहीं इतने तेज रफ्तार वाहन थे। आगरा में आजादी का जश्न मनाया जा रहा था। खबर मिली तो उनका मन कुलाचें भरने लगा। सभी जरूरी काम छोड़ वह बांदा के लिए रवाना हो गए। उनकी इच्छा थी कि वह अपने परिवार व शहर में यह खुशियां अपनों के बीच मनाएं। दो दिन उन्हें लगा बांदा पहुंचने में, लेकिन तब भी यहां खुशियों का वैसा ही माहौल था।

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