दो करोड़ से संवारे तालाब में नहा रहीं हैं भैंसें

Banda Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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बांदा। शहर के एकमात्र साफ-सुथरे और ऐतिहासिक तालाब नवाब टैंक के पुनरोद्धार और सुंदरीकरण पर खर्च किए गए लगभग 2 करोड़ रुपए बेमतलब साबित हो रहे हैं। चारों ओर ग्रिल से घिरे लबालब तालाब में भैंसें नहलाई जा रही हैं। यहां बड़ी संख्या में रोजाना शहर के बाशिंदे स्नान करते हैं। पानी प्रदूषित होने से उन्हें बीमार होने का खतरा मंडरा रहा है।
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नवाब टैंक 1857 के पूर्व तत्कालीन नवाब बांदा अली बहादुर सानी ने बनवाया था। काफी गहरा और आकर्षक व तकनीकी डिजाइन वाला यह तालाब आज भी मशहूर है। दो वर्ष पूर्व तत्कालीन सिंचाई मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी की पहल पर एक करोड़ 84 लाख 37 हजार रुपए की लागत से इस तालाब का पुनरोद्धार और सुंदरीकरण कराया गया था। पूरे तालाब का पानी खाली कर इसे गहरा भी कराया गया। तालाब के चारों ओर लोहे की ग्रिल लगी है। चारों ओर घाट है। जिन पर रोजाना तड़के से शाम तक बड़ी तादाद में लोग स्नान करते हैं। तालाब की रखवाली और निगरानी का जिम्मा सिंचाई विभाग पर है। यहीं इसका कार्यालय भी है।
सिंचाई विभाग अधिकारियों की अनदेखी का फायदा उठाकर तालाब को प्रदूषित और बदसूरत किया जा रहा है। रोजाना तालाब के अंदर भैंसों के झुंड उतारकर उन्हें नहलाया जा रहा है। भैंसों के गोबर और पेशाब से पानी प्रदूषित हो रहा है। तमाम वाहन भी तालाब में धोए जा रहे हैं। सिंचाई विभाग की नाक तले हो रहे इन नियमों के उल्लंघन पर अधिकारी खामोश हैं।
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