खेतों में पानी पहुंचा नहीं, 30 साल से दे रहे शुल्क

Banda Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
बांदा। चार गांवों के किसान 30 वर्षों से खेतों की सिंचाई किए बिना ही शुल्क भरने को मजबूर हैं। किसानों ने कई बार तहसील प्रशासन से लेकर विभागीय अधिकारियों तक गुहार लगाई लेकिन अन्नदाता की ये पीड़ा किसी ने नहीं सुनी। गांव से होकर नहर गुजरी है, फिर भी उन्हें सिंचाई का लाभ नहीं मिल रहा।
अतर्रा तहसील में स्थित पिंडखर गांव से रजबहा निकला है। इसी से एक माइनर निकाली गई है जो सिकलोढ़ी, इटरा, मरौली, पवई तक गई है। किसानों का दर्द यह है कि माइनर में हेड न होने तथा कटान के चलते सिंचाई के वक्त पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाता। करीब 30 साल से किसान नहर विभाग के उच्चाधिकारियों तथा तहसील व जिला प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं। बावजूद इसके उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। पिंडखर के किसान वैद्य शिवदर्शन सिंह ने बताया कि सींचपाल बिना मौका देखे हर साल सिंचाई दर्ज कर लेते हैं। उन्हें यह शुल्क मजबूरी में जमा करना पड़ता है। किसान रामकुमार कहते हैं कि अन्नदाता अधिकारियों के चौखट पर दर-दर भटकता है। हर बार आश्वासन दे दिया जाता है, लेकिन मौके पर जाकर उनकी समस्या दूर करने की कोई नहीं सोचा। हरेक किसान को लगभग ढाई से तीन सौ रुपए सालाना सिंचाई शुल्क के रूप में अदा करना पड़ रहा है। जो किसान इसे अदा नहीं कर पा रहे उनकी यह राशि बढ़कर हजारों में पहुंच गई है। पिंडखर के ही किसान गऊदीन बताते हैं कि गांव के निकट माइनर में हेड के आसपास कटान है। ऐसे में पानी न तो नहर में चढ़ पाता और न ही खेतों तक पहुंच पाता। कुसमा के किसान रामनेवाज बताते हैं कि दो वर्ष पूर्व नहर विभाग के अधिशाषी अभियंता ने उनकी मन्नत पर झाल के आसपास पटरी पक्की कराने की बात कही थी। बाद में यह आश्वासन कोरा ही निकला। यहीं के किसान शिवदर्शन व रामकुमार प्रशासन व नहर विभाग की मनमानी से आहत हैं। कहते हैं कि यदि पटरी पक्की हो जाए तो उन्हें सिंचाई की सुविधा मिलने लगेगी। बिना सिंचाई यहां के किसानों की करीब दो एकड़ भूमि परती रह जाती है। आसपास नलकूप भी नहीं है।
दूर होगी समस्या : एसडीएम
बांदा। उप जिलाधिकारी अतर्रा अशोक कुमार पुष्कर ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसी शिकायत मिली तो वह मौके की जांच कराकर किसानों की यह समस्या दूर करने का प्रयास करेंगे।

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