मुठभेड़ के बाद पप्पू यादव गिरोह के तीन डकैत बंदी

Banda Updated Sun, 22 Jul 2012 12:00 PM IST
बांदा/कालिंजर। पप्पू यादव गिरोह के सक्रिय सदस्य रहे दस्यु अनुराग मिश्रा की मौजूदगी की भनक पर पुलिस द्वारा की गई घेराबंदी में मुठभेड़ के बाद तीन बदमाशों को दबोच लिया गया। लेकिन अनुराग पुलिस के हाथ नहीं आया। पकड़े गए तीनों बदमाश पप्पू यादव गिरोह के सदस्य रहे हैं। इनमें एक बदमाश पर यूपी-एमपी पुलिस से ईनाम घोषित है। एक राइफल और दो तमंचे समेत कारतूस बरामद हुए हैं।
शनिवार को दोपहर ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलीय कालिंजर गोलियों से गूंज उठा। पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ के दौरान कई राउंड गोलियां चलीं। पुलिस को भनक मिली थी कि कालिंजर दुर्ग सामूहिक हत्याकांड का मुख्य आरोपी और पुलिस हिरासत से फरार पप्पू यादव गिरोह का सदस्य अनुराग मिश्रा कालिंजर थाना क्षेत्र के सुरसई गंगा (पाताल गंगा) के नजदीक मौजूद है। कालिंजर थानाध्यक्ष फोर्स के साथ तलहटी कालिंजर स्थित मिनी सचिवालय के पास पहुंचे तो सचिवालय में छिपे बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी मोर्चा संभाल लिया। खबर पाकर पुलिस अधीक्षक ज्ञानेश्वर तिवारी और अपर पुलिस अधीक्षक स्वामी प्रसाद पीएसी के साथ बांदा से मुठभेड़ स्थल कूच कर गए। उधर, अतर्रा व नरैनी क्षेत्राधिकारी और फतेहगंज, अतर्रा, नरैनी, बदौसा थानाध्यक्ष व करतल चौकी प्रभारी सहित भारी मात्रा में फोर्स भी तलब कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक लगभग दो घंटे तक चली मुठभेड़ के बाद तीन बदमाश पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
पकडे़ गए बदमाशों में गंभीर सिंह पुत्र कल्लू सिंह के पास राइफल और कारतूस बरामद हुए। वह बिल्हरका (नरैनी) का रहने वाला है। उस पर यूपी पुलिस से 2500 और एमपी पुलिस ने 2000 रूपए का ईनाम घोषित कर रखा था। दोनों सूबों के थानों में उस पर लूट, हत्या, डकैती, अपहरण, वसूली के दर्जनों मुकदमें हैं। दबोचा गया दूसरा बदमाश मुन्नू सिंह उर्फ नारायण पुत्र रामरतन के पास तमंचा और पांच कारतूस बरामद हुए। यह कालिंजर का रहने वाला है। तीसरा बदमाश रामलखन पुत्र रामदयाल विश्वकर्मा बताया गया। इसके पास भी तमंचा और कारतूस बरामद हुए। यह भी कालिंजर का रहने वाला है। दबोचे गए तीनों बदमाश पप्पू यादव गिरोह के सदस्य रहे हैं। तीनों पर यूपी-एमपी में मुकदमें हैं। पुलिस अधीक्षक ने कालिंजर थानाध्यक्ष सीबी सिंह और उनकी टीम को ढाई हजार रूपए ईनाम की घोषणा की है।
गौरतलब है कि कालिंजर नरसंहार के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार पप्पू यादव गैंगवार में मारा जा चुका है। हालांकि लाश बरामद न होने से पुलिस के अभिलेखों में वह जिंदा है। पप्पू यादव ने जनवरी 2003 में कालिंजर किले में 8 निर्दोष लोगों की गोली मारकर सामूहिक हत्या कर दी थी। उसके गिरोह के कई सदस्य अभी भी फरार हैं। इन्हीं में से अनुराग मिश्रा है। वह जेल से अदालत जाते समय पुलिस हिरासत से फरार हो गया है।

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