किताबें मिली नहीं तो कैसे हो पढ़ाई

Banda Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
बांदा। नया शिक्षा सत्र शुरू हुए एक पखवारा से अधिक का समय बीत गया, अभी तक स्कूलों में नि:शुल्क किताबें नहीं पहुंच सकीं। ब्लाक संसाधन केंद्रों (बीआरसी) में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों की तीन विषयों की किताबें तो आ गई हैं, लेकिन उनका वितरण अभी नहीं किया गया। बीआरसी में प्रभारियों का कहना है कि जब सारी किताबें आ जाएंगी, तभी प्रधानाध्यापक इन्हें ले जाएंगे। बिना बैग व किताबों के स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं शिक्षक भी स्कूल में किसी तरह समय पास कर ड्यूटी के बाद घर चले जा रहे हैं।
परिषदीय विद्यालयों में पूरे शिक्षा सत्र 365 दिनों में बमुश्किल 185 दिन ही कक्षाएं चलती हैं। बाकी दिन सरकारी अवकाश या फिर अन्य कारणों से बच्चों को घर बैठना पड़ता है। उधर, अर्द्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षाओं के समय भी बच्चे कक्षाओं में पढ़ाई नहीं कर पाते। परीक्षाओं में भी करीब 40 से 50 दिन का समय निकल जाता है। करीब 15 जुलाई से नियमित कक्षाएं संचालित हुईं तभी बच्चे स्कूल में शिक्षा सत्र के दौरान 100 या फिर 120 दिन कक्षा में पढ़ाई कर पाते हैं। शासन व शिक्षा महकमे की लापरवाही से नए शिक्षा सत्र के शुरुआत में ही बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है। सत्र शुरू हुए करीब पखवारे का समय बीता गया, पर विद्यालयों में अभी तक नि:शुल्क वितरित होेने वाली किताबें नहीं पहुंचीं। शिक्षा महकमे के अधिकारियों का कहना है कि शासन से हिंदी, गणित व इतिहास तीन विषय की किताबें आई हैं, जो सभी बीआरसी भेजी जा चुकी हैं। उनका जल्द ही वितरण कराया जाएगा। बीआरसी प्रभारियों का कहना है कि प्रधानाध्यापक बीआरसी से किताबें अभी नहीं ले जा रहे हैं। उनका तर्क है कि शासन से बीआरसी से स्कूल तक किताबें ले जाने के लिए कोई भाड़ा या किराया नहीं मिलता। यह सारा खर्च उनकी जेब से होता है इसलिए जब सभी विषयों की किताबें आ जाएंगी, तभी वे स्कूल ले जाएंगे। स्कूल-कालेजों में किताब, कॉपी व बैग के बिना छात्र-छात्राएं विद्यालय जाते तो हैं, लेकिन उन्हें बिना पढ़ाई ही मजबूरी में घूम-फिर कर घर लौटना पड़ता है। यही स्थिति शिक्षक-शिक्षिकाओं की भी है। सुबह से दोपहर तक ड्यूटी की फर्ज अदायगी कर घर पहुंच जा रहे हैं। सभी परिषदीय विद्यालयों में बिना कापी-किताब पठन-पाठन का कार्य प्रभावित है।

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