80 कर्जदार, पांच किसान दे चुके जान

Banda Updated Fri, 06 Jul 2012 12:00 PM IST
बांदा। नरैनी क्षेत्र को गोपरा गांव कर्ज के मकड़जाल में बुरी तरह उलझा हुआ है। इक्का-दुक्का परिवारों को छोड़कर सभी कर्जदार हैं। उनकी जमीनें बंधक हैं। महिलाओं के गहने भी साहूकारों के यहां गिरवी रखे हुए हैं। इन हालातों से हिम्मत हार गए पांच किसानों ने पिछले चार वर्षाें में आत्महत्या कर ली है।
मध्य प्रदेश की सरहद पर स्थित गोपरा गांव की आबादी लगभग एक हजार है। यहां के बाशिंदे मजदूरी के लिए या तो पलायन करते हैं या सन-सुतली काटकर बमुश्किल सूखी-रूखी रोटी का जुगाड़ करते हैं। भरपेट भोजन इनके लिए किसी सपने से कम नहीं। हालात सुधारने और भूख मिटाने की लालच में अपने को कर्जदार बना लिया। जमीन बंधक हो गई। फिर अदायगी भी नहीं कर सके। ऐसे में जमीन और गहने गिरवी रखने के बाद कल्लू केवट की पत्नी बच्चू ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन वर्ष 2010 में आत्मदाह कर लिया। उसने 2007 में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की नहरी शाखा से सात हजार रुपए कर्ज लिया था। उसके दो मासूम पुत्र और एक पुत्री है। पति कल्लू दिल्ली पलायन कर गया है। तीनों बच्चे गांव में घूम-फिरकर रोटी मांगकर पेट भरते हैं।
इसी तरह गौरीशंकर की पत्नी बच्चा ने फरवरी 2008 में कीटनाशक गोलियां खाकर खुदकुशी कर ली। पति मजदूरी करने के लिए दिल्ली पलायन कर गया था। इधर, दो बच्चों को दो जून की रोटी भी नहीं मिल पा रही थी। बच्चों की बदहाली देखकर पति गौरीशंकर ने भी 2010 में आत्महत्या कर ली। अब उसके दोनों मासूम बच्चे 6 वर्षीय भूपत और 8 वर्षीय मिथला लावारिस होकर गांव में ग्रामीणों के रहमोकरम पर जिंदगी बिता रहे हैं। इसी तरह 24 वर्षीय सरोज पत्नी ओमप्रकाश ने इसी वर्ष चैत्र की नवरात्र पर फांसी लगा ली। दरअसल सरोज ने नमक और हल्दी के लिए घर में रखा एक किलो चना बेच दिया था। इस पर पति नाराज हो गया कि अब वह बीजा कहां से लाएगा। इसी सदमे में सरोज ने फांसी लगा ली। बैंक से 50 हजार रुपए कर्ज लेकर अदायगी न होने से रज्जू केवट ने 23 अप्रैल 2012 को आत्महत्या कर ली। उसने वर्ष 2007 में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक नहरी से कर्ज लिया था। रज्जू का पुत्र बच्चू अपने परिवार के साथ सूरत में मजदूरी करता है। इन्हीं हालात में हिम्मत हारकर वर्ष 2010 में मनकू पुत्र सैकू ने भी खुदकुशी कर ली थी।
सामाजिक कार्यकर्ता और विद्याधाम समिति के मंत्री राजाभइया बताते हैं कि गांव के 80 परिवारों ने इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की नहरी शाखा से कर्ज ले रखा है। अदायगी नहीं कर पा रहे हैं। वसूली का खौफ इतना समाया हुआ है कि कोई सरकारी वाहन गांव में आ जाए तो रिकवरी वाले मानकर कर्जदार ग्रामीण इधर-उधर छिप जाते हैं।

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