निधि से कार तो दूर साइकिल भी नहीं लेंगे

Banda Updated Thu, 05 Jul 2012 12:00 PM IST
बांदा। विधायक निधि से विधायकों को लग्जरी कार के लिए 20 लाख रुपए के प्रावधान पर चौतरफा विरोध के चलते प्रदेश सरकार भले ही बैकफुट पर आ गई हो लेकिन इस निर्णय का विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायकों ने खुला विरोध किया है। कुछ ने तो कहा कि लग्जरी वाहन तो दरकिनार निधि से वह साइकिल भी नहीं ले सकते। हालांकि और कांग्रेस के एक विधायक लग्जरी वाहन लेने को तैयार जरूर दिखे।
कांग्रेस विधायक दलजीत सिंह ने कहा कि वह लग्जरी कार तो दूर की बात निधि से साइकिल भी नहीं ले सकते। बोले, वह तो शुरू से ही निधि का विरोध कर रहे हैं। इसे बंद होना चाहिए। कमीशनखोरी हो रही है इसीलिए अधिकारी भी कमीशन से नहीं चूक रहे। विधायक ने कहा कि निधि बंद करके विधायकों से विकास कार्याें के प्रस्ताव लिए जाना चाहिए।
बसपा विधायक और विधान सभा में विरोधी दल उप नेता गयाचरण दिनकर ने कहा कि निधि विकास के लिए मिलती है। निजी इस्तेमाल के लिए नहीं। विधायक को निधि से वाहन देने का कोई मतलब नहीं। सरकार को यह तोहफे देना है तो राज्य संपत्ति विभाग से दे। जैसे मंत्रियों और सचिव व अफसरों को वाहन दिए गए हैं। उधर, कांग्रेस विधायक विवेक कुमार सिंह ने कहा कि दिया जाने वाला वाहन सरकारी संपत्ति होगा, विधायक का निजी नहीं। पांच वर्ष बाद विधायक चाहे तो वाहन की वैल्यूवेशन निकलाकर उतना पैसा जमा करके वाहन ले सकता है। वरना वाहन वापस जमा हो जाएगा। निधि से विधायकों को कंप्यूटर पहले से ही मिल रहा है। कहा कि कुछ विधायक रिक्शे पर चलते हैं जबकि अधिकारी कभी प्राइवेट गाड़ी पर नहीं चलते। उन्हें सरकारी वाहन मिलते हैं। सांसदों को पेट्रोल सहित वाहन दिया गया है। अब तो सांसद के लिए कलेक्ट्रेट में कार्यालय बनाया जा रहा है। इसके लिए पांच लाख रूपए खर्च होंगे।
सपा विधायक विशंभर सिंह यादव ने कहा कि विधायक पूरा वक्त और भ्रमण जनहित में करते हैं। कई प्रदेशों में तो एक हजार रुपए प्रति दिन वाहन भत्ता भी मिलता है। यहां तो गाड़ी का मेंटीनेंस विधायक को जेब से करना होगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में अभी डीजल के लिए 96 हजार और 1 लाख 4 हजार रुपए के रेलवे व जहाज कूपन मिलते हैं। विधायक निधि से वाहन मिला तो वह जरूर ले लेंगे। इसी प्रकार सपा के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व विधायक विशंभर प्रसाद निषाद ने भी विधायकों को निधि से लग्जरी वाहन खरीदने की वकालत की। कहा कि यह वाहन सरकारी होगा। बाद में विधायक को वाहन या उसकी कीमत वापस करनी होगी। विधायक को वाहन के लिए अब तक मात्र एक लाख रुपए लोन मिलता है।

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