176 स्मारकों की निगरानी को सिर्फ 40 कर्मचारी

Banda Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
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रशीद सिद्दीकी
बांदा। पुरातत्व महत्व के ऐतिहासिक स्मारकों का गढ़ है बुंदेलखंड। लगभग 29 हजार वर्ग किलोमीटर के पथरीले इलाके में 176 स्मारक हैं। इतने स्मारक देश के अन्य किसी भाग में शायद ही हों, किंतु भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग स्मारकों की रखवाली की रस्म अदायगी कर रहा है। इतने स्मारकों की निगरानी के लिए मात्र 40 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इन्हें हर साल 96 लाख रुपए वेतन के रूप में दिए जा रहे हैं। देखरेख के अभाव में स्मारकों को नुकसान पहुंचाने और चोरी होने का सिलसिला जारी है।
सातों जनपदों में पुरातत्व महत्व के स्मारक आज भी मौजूद हैं। इनमें दुर्ग, बावली, तालाब, सीढ़ीदार कुएं, धार्मिक स्थल इत्यादि शामिल हैं। सबसे ज्यादा 75 स्मारक ललितपुर में हैं। दूसरे नंबर पर महोबा है, जहां 30 पुरातत्व महत्व के स्मारक हैं। बांदा और चित्रकूट में 19-19 और झांसी में 3 स्मारक सूचीबद्ध हैं। जालौन में 9 और हमीरपुर में मात्र 3 स्मारक पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज हैं। हमीरपुर इकलौता जनपद है, जहां पुरातत्व विभाग ने स्मारकों की निगरानी के लिए कोई कर्मचारी नहीं रखा है, जबकि झांसी में 17, बांदा व महोबा में 7-7, ललितपुर में 6, चित्रकूट में 2 और जालौन में एक कर्मचारी है। इनको वेतन के रूप में सबसे ज्यादा 38 लाख 77 हजार रुपए झांसी में दिए जाते हैं। बांदा में 16 लाख 65 हजार, महोबा में 16 लाख 59 हजार, ललितपुर में 16 लाख 6 हजार, चित्रकूट में 5 लाख 87 हजार और जालौन में 2 लाख 30 हजार रुपए वेतन के रूप में दिया जा रहा है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उप अधीक्षक (लखनऊ) इंदुप्रकाश द्वारा जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत यह जानकारियां अखिल भारतीय बुंदेलखंड विकास मंच महासचिव नसीर अहमद सिद्दीकी को दी गई हैं। सिद्दीकी ने बताया कि दर्ज स्मारकों में 40 जल संग्रह से संबंधित हैं। दूसरी तरफ चरखारी का महल, सरीला, पनगरा के भवन और भूरागढ़ किला आदि सहित 200 स्मारकों को सूचीबद्ध नहीं किया गया है। 140 स्मारक अति प्राचीन मंदिर और चार विशाल मसजिदें व ईसाइयों की कब्रगाहें हैं। स्मारक मसजिदों में सबसे बड़ी बांदा की नवाबी जामा मसजिद है। किलो में सबसे बड़ा कालिंजर किला है।
पुरातत्व महत्व के कुछ स्मारक
d बांदा- जनरल व्हाईट लाक की याद में बना स्मारक सिविल लाइन, जामा मसजिद, क्लोज्ड सिमेट्री (कब्रिस्तान) कटरा, भवानीपुर बावली, वीरपुर चंदेल मंदिर, बालारी मठ गुड़रामपुर, गुड़रामपुर मंदिर, रौली की गुफाएं, मड़फा किला, मुख्य द्वार रसिन, पुराना किला व चंडी महेश्वरी मंदिर रसिन, पत्थर का टैंक रसिन, सती के खंभे रसिन, कालिंजर किला मार्ग, सात गेट वाला कालिंजर किला, महादेव मंदिर रास्ता सहित, सीताकुंड, सीता सेज, पाताल गंगा, पांडु कुंड, भैरव की झिरिया, सिद्ध की गुफा, बागवान सेज, पानी का अमान, मृगधारा, कोटि तीरथ, नीलकंठ मंदिर आदि।
d चित्रकूट- चंदेल मंदिर, बरगढ़ मंदिर, ब्रिटिश कब्रिस्तान बरगढ़, जैन मंदिर लुखरी, मऊ के दो ध्वस्त मंदिर, मऊ में पीपल वृक्ष के नीचे शिलालेख, बड़ा लिंग मंदिर मऊ, बड़ा मंदिर रागनगर, प्रोस्ट हाउस रामनगर, बड़ा मंदिर अवशेष रामनगर, पहाड़ी किला, हहेटी मंदिर खोह कर्वी, मानिकपुर छावनी कब्रिस्तान, शिला मंदिर गणेश बाग, कब्रिस्तान कर्वी, कर्वी मंदिर, रिखैन गुफाएं बारह कोटरा, भरदेउल के मंदिर, पैश्वनी नदी के तट पर बेसाल्ट चट्टान पर लिखे शिल्प लेख।
d महोबा- मछी किला भवन के पास कब्रिस्तान हुसैनाबाद, चंदेल मंदिर व छोटा राजगिरी टैंक अकोना, चकरिया दाई बगवा, चरना ग्रेनाइट मंदिर, भैसासुर टीला, ब्रह्मताल व बैठक कबरई, पहाड़ी का महल कुलपहाड़, मझरी नीव मदन सागर, मदन सागर झील में ककरा मठ, हाथियों की मूर्तियां, ग्रेनाइट पिलर, टिकरी पुर जामा मसजिद, कीरत सागर झील, मदनसागर झील, विष्णु सागर, परममल महल मदनसागर, आल्हा की लाट मल्हुआ देव, टिकरीपुरा, 24 पत्थरों से बनी आकृति बड़ी चंदरी, ग्रेनाइट मंदिर मकरबई, मकरबई मंदिर, मोहारी ग्रेनाइट मंदिर, पनवाड़ी का संवत, रहलिया मंदिर, बड़ा टैंक पठारी कदीन, सिजारी मंदिर, रावतपुर के चंदेलकालीन टैंक, छोटे मंदिर रावतपुर, बारातल टैंक श्रीनगर, ब्रहम निकल मंदिर सुकूरा, जैन मंदिर सुकूरा।
d हमीरपुर- कछुवा की मूर्ति कला, ईंटों का टीला, ब्रिटिश कब्रिस्तान कैथा।

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