जबरदस्त कमाई, दुश्मनी बढ़ाई

Banda Updated Sun, 24 Jun 2012 12:00 PM IST
रशीद सिद्दीकी
बांदा। बालू के लिए हत्याएं नेता और माफियाओं के बीच तेजी से पनप रहे गठबंधन का नतीजा है। खदानों को खून से रंगने के पीछे अंधाधुंध कमाई जुड़ी हुई है। बुंदेलखंड खनन का गढ़ है। यहां सरकार को हर वर्ष लगभग डेढ़ अरब रुपए राजस्व के रूप में मिलते हैं लेकिन इससे कई गुनी ज्यादा रकम माफियाओं की जेबों में जाती है। इसी कमाई ने ही वर्चस्व को लेकर दुश्मनी बढ़ाई है।
बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर में बालू का खनन और कारोबार ज्यादा है। हालांकि शासन को इसमें नाम मात्र का राजस्व मिलता है। प्रति वर्ग घनमीटर बालू की रायल्टी मात्र 32 रुपए है जबकि खदान में ठेेकेदार और माफिया इसे 100 गुना ज्यादा तक बढ़ाकर बेचते हैं।
असल में बालू के दामों पर खनिज विभाग या प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। ऐसे में माफिया और ठेकेदारों के रहमोकरम पर है कि वह जितना चाहें उस भाव पर बालू बेचें। एक ट्रक बालू में सरकार को रायल्टी के रूप में बमुश्किल लगभग 768 रुपए प्राप्त होते हैं लेकिन खदान ठेकेदार एक ट्रक बालू की कीमत खदान पर कम से कम 15 हजार रुपए वसूल रहा है। इसी अंधाधुंध कमाई की होड़ को लेकर ही अक्सर खून-खराबा होता है। शुक्रवार को कनवारा घाट को लेकर जो हत्या हुई उससे पहले भी यहां बालू के विवाद में ही जानें जा चुकी हैं। कई वर्षाें पूर्व तेज तर्रार छात्र नेता धर्मपाल सिंह बालू धंधे में शामिल हुए तो उन्हें अपनी जान गंवाना पड़ी। इसी घाट पर उन्हें गोलियों से भून दिया गया था। फरवरी 2010 में भी यहां बालू घाट मैनेजर वीरेंद्र कुमार द्विवेदी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

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