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केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना शुरू हो तो बात बने

Banda Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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बांदा। करोड़ों रुपए की परियोजनाएं लागू करने के बाद भी बुंदेलखंड को भरपूर पानी मयस्सर न होने पर एक बार फिर 11 हजार करोड़ की भारी भरकम रकम से इस क्षेत्र को पानीदार बनाने की योजना पर अमल शुरू हुआ है। इसमें कुछ परियोजनाएं लगभग पूरी हो गई हैं और कुछ पर काम चल रहा है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना है। 9393 करोड़ रुपए लागत वाली यह परियोजना अभी केंद्र और यूपी-एमपी सरकारों के मध्य फाइलों में है। इन परियोजनाओं के पूरी तरह शुरू हो जाने के बाद बुंदेलखंड की 6 लाख 34 हजार हेक्टेयर भूमि को भरपूर पानी मिलने की उम्मीद है।
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जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त सूचनाओं में बताया गया है कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त साझे में बुंदेलखंड के सातों जनपदों के लिए यह परियोजनाएं तैयार की गई हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण योजना केन-बेतवा गठजोड़ परियोजना है। यह 9393 करोड़ रुपए लागत की है। इससे बांदा, चित्रकूट और महोबा जनपदों को सिंचाई और पीने के लिए पानी मिलेगा। लगभग 3.83 लाख हेक्टेयर भूमि सींची जा सकेगी। झांसी जनपद को भी फायदा होगा। 77 मीटर ऊंचे बांध से 219 किलोमीटर लंबी नहर निकाली जाएगी। इसमें ओरछा में 78 मेगावाट क्षमता का पावर हाउस बनेगा।
जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत निदेशक नेशनल प्रोजेक्ट डीके सिंह और एसके सिन्हा (निदेशक प्रबोधन केंद्रीय जल आयोग) की साझा रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड में त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआईबीपी) के तहत कई सहायताएं दी हैं। इनमें लहचूरा बांध की अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपए है। जिसमें 266 करोड़ रुपए एआईबीपी से दिए गए हैं। इसकी क्षमता 15 हजार हेक्टेयर है। काफी हद तक चालू हो चुकी इस परियोजना से हमीरपुर और महोबा को लाभ मिल रहा है। यह योजना पिछले वर्ष बनकर तैयार हो गई है। दूसरी योजना कचनौड़ा बांध (ललितपुर) है। 423 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना में 362 करोड़ एआईबीपी से मिले हैं। इसी वर्ष तैयार हुई है। वैसे तो इसकी क्षमता 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई बताई गई थी लेकिन सिंचाई हो पा रही है सिर्फ 3255 हेक्टेयर की। तीसरी अर्जुन सहायक परियोजना है। यह वर्ष 2014 तक पूरी होगी। 807 करोड़ रुपए लागत की इस योजना में 741 करोड़ रुपए एआईबीपी से मिले हैं। महोबा, हमीरपुर और बांदा की 44 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई प्रस्तावित है। चौथी परियोजना राजघाट नहर परियोजना है। 398 करोड़ रुपए लागत वाली इस परियोजना की सिंचाई क्षमता 139 हजार हेक्टेयर है। ललितपुर, झांसी, जालौन और हमीरपुर जनपदों को इसका लाभ मिल रहा है। सिंचाई विभाग के आंकडे़ बताते हैं कि बुंदेलखंड क्षेत्र में नहरों को विकसित करने के लिए 97 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इन नहरों से 24,480 हेक्टेयर भूमि सींची जा रही है। बुंदेलखंड में बोए जाने के योग्य रकबा 18.54 लाख हेक्टेयर है जबकि खेती योग्य 21.87 लाख हेक्टेयर है।
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