बताता है शोध ः हर किसान की तमन्ना है केसीसी बनवाना

Banda Updated Wed, 20 Jun 2012 12:00 PM IST
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बांदा। कर्ज या बदहाली से तंग आकर बुंदेलखंड में किसानों की आत्महत्याओं के मामले में एक शोध में यह बात सामने आई है कि हर छोटा-बड़ा किसान किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बनवाना ही चाहता है। रिसर्च में यह बात भी पता चली है कि ज्यादातर किसानों का मानना होता है कि उनका कर्ज माफ हो जाएगा और बिना कुछ किए ही कर्ज ली गई रकम का इस्तेमाल वह अपनी निजी जरूरतों के लिए कर लेता है। बाद में कर्ज की रकम बढ़ने पर वह परेशान होकर आत्मघाती कदम उठा लेता है। अपनी एक किताब के लिए डा.भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रवक्ता डा.सुधीर (लखनऊ) बुंदेलखंड में रिसर्च कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों की आत्महत्याओं के वैसे तो कई कारण हैं लेकिन केसीसी बनवाने की प्रवृत्ति इसमें खास है। हाल ही में उन्होंने बुंदेलखंड के गांवों का भ्रमण किया है। साथ में स्वयंसेवी संगठन प्रवास के आशीष सागर भी थे। वह बताते हैं कि कृषि लेने वाले की मनोवैचारिकी यही रहती है कि 50 हजार तक का लिया गया कर्ज माफ ही हो जाएगा। बीपीएल व अंत्योदय का मानक भी सही नहीं है। रसिन गांव का हवाला देकर बताया कि जहां मात्र दो बीघा वाले सुरेश यादव के अनाथ परिवार को बीपीएल कार्ड जारी किया गया है वहीं 12 बीघा कृषि भूमि वाले बृजमोहन यादव के पास अंत्योदय कार्ड है। ब्यूरो
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