इंजीनियरिंग विभाग दोषी!

Banda Updated Wed, 20 Jun 2012 12:00 PM IST
बांदा। बुधवार की रात प्लेटफार्म के नजदीक पटरी से उतरकर दुर्घटनाग्रस्त हुई मालगाड़ी के मामले में रेल अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। प्रथम दृष्टता इसमें रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही सामने आई है। उधर, दुर्घटना स्थल की रेल पटरियां बदलने का काम शुरू हो गया।
13 जून की रात रेलवे स्टेशन के नजदीक पटरियों के दोनों ओर गिट्टियां गिरा रहीं मालगाड़ी के इंजन से जुड़ी बोगी पटरी से उतरकर क्षतिग्रस्त हो गई थी। चूंकि रफ्तार काफी कम थी इसलिए कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। दुर्घटना के बाद कई यात्री ट्रेनें प्रभावित और लेट-लतीफ हुई। डिवीजनल रेलवे मैनेजर, झांसी ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। बांदा स्टेशन के यातायात प्रभारी केके वर्मा के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम ने जांच की। तीन दिनों बाद समिति द्वारा जांच पूरी करके रिपोर्ट वरिष्ठ मंडल सुरक्षा अधिकारी को सौंप दी है।
सूत्रों के मुताबिक जांच में पाया गया है कि मालगाड़ी के पटरी से उतरने के पीछे इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही है। दुर्घटना के समय ट्रेन की रफ्तार मात्र पांच किलोमीटर थी। हालांकि शंटिंग के दौरान भी रफ्तार 15 किलोमीटर निधर्ािरित है। ट्रेन चालक और सहायक ने पावर ब्रेक का भी इस्तेमाल नहीं किया था। जांच टीम ने मालगाड़ी के चालक से भी पूछताछ की। गाड़ी के पावर मीटर को सीलबंद कर जांच के लिए झांसी भेजा गया।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पटरियों के सही रखरखाव न होने से यह दुर्घटना हुई। इसके लिए इंजीनियरिंग विभाग जिम्मेदार है। सूत्र बताते हैं कि इस विभाग के दोषी अधिकारियों और कर्मियों पर कार्रवाई की जा सकती है। उधर, इस बारे में रेलवे झांसी के पीआरओ रवि प्रकाश से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने अपना फोन रिसीव नहीं किया। उधर, जांच निपटते ही रेलवे ने दुर्घटना वाले स्थल पर रेल पटरी बदलाने का काम तेजी से शुरू कर दिया है।

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