पांच साल में खपे पांच करोड़, पर बदली नहीं सूरत

Banda Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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बांदा। शहर की सूरत बदलने के लिए नगर पालिका परिषद ने पिछले पांच वर्षाें में सिर्फ पालिका निधि के 5 करोड़ 40 लाख रुपए खर्च कर दिए पर ऐसा कुछ खास हुआ नहीं। पालिका में तीन सैकड़ा से ज्यादा सफाई कर्मचारियों के बावजूद शहर में जगह-जगह गंदगी दिखाई पड़ती है। रोड लाइन के नाम पर डेढ़ करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं लेकिन सड़कें-गलियों में रात में बत्ती जलती नहीं दिखती।
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यह भारी भरकम खर्च उस अवधि में हुआ जब पालिका की कमान जनप्रतिनिधियों यानि निर्वाचित बोर्ड के हाथों थी। जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत अधिशासी अधिकारी द्वारा स्वयं सेवी आशीष सागर दीक्षित को उपलब्ध कराई गई जानकारियों से यह खुलासा हुआ है। हालांकि जानकारी में खर्च का विवरण बताने से परहेज किया गया। सिर्फ एकमुश्त रकम बता दी गई है। कहा गया है कि पांच वर्षाें में पालिका निधि से 545 निर्माण कार्य कराए गए हैं। इन पर 5,40,76,793 रुपए खर्च हुए हैं। यह भी बताया गया है कि पालिका में कुल 311 सफाईकर्मी तैनात हैं। इनमें 104 स्थायी और 207 संविदा सफाई कर्मी हैं। इन सबको विभिन्न वार्डाें, सड़कों व गलियों में तैनात किया गया है।
इसी प्रकार अंधेरे में डूबीं शहर की गलियों को रोशनी मुहैया कराने के नाम पर नगर पालिका ने बीते पांच वर्षाें में एक करोड़ 57 लाख 84 हजार रुपए खर्च बताए हैं। यह रकम राज्य वित्त आयोग, 13वें वित्त आयोग और पालिका निधि से खर्च की गई है। इसके अलावा पालिका ने स्टेशनरी के नाम पर 3,17,867 रुपए का भुगतान किया है। यह भुगतान कुमार बुक डिपो, ओम बुक हाउस और विद्या प्रिंटर्स को किया गया है।
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