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संदर्भ ग्रंथ में शामिल की गईं झलकारी बाई

Banda Updated Sat, 16 Jun 2012 12:00 PM IST
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बांदा। प्रदेश सरकार द्वारा प्रति वर्ष प्रकाशित किए जा रहे ‘संदर्भ ग्रंथ उत्तर प्रदेश’ में बुंदेलखंड की वीरांगना झलकारी बाई का नाम सम्मिलित कर लेने पर खुशी जताई गई है।
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक शिवप्रसाद भारतीय ने बताया कि पूर्व में इस ग्रंथ में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त, उपन्यासकार वृंदावन लाल वर्मा और प्रगतिशील कवि बाबू केदारनाथ अग्रवाल के ही चित्र शामिल होते थे। उन्होंने बुुंदेलखंड की वीरांगना झलकारी बाई का नाम शामिल करने के लिए शासन को सुझाव भेजा था। इस पर विचार के बाद शासन ने इसे स्वीकार करते हुए 2011 के अंक में पृष्ठ 156 पर प्रकाशित किया है। यह बुंदेलखंड के लिए गौरव की बात है। वीरांगना झलकारी बाई रानी लक्ष्मीबाई की सेना में महिला सेना की सेनापति थीं। अंतिम समय में जब रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजी सेना से घिर गईं तो वीरांगना झलकारी बाई ने रानी से हमशक्ल होने का फायदा उठाते हुए रानी लक्ष्मीबाई को सकुशल बाहर निकाल दिया और खुद रानी लक्ष्मीबाई बनकर लड़ते हुए शहीद हो गई थीं। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा यह ग्रंथ वर्ष भर की उपलब्धियों को शामिल करते हुए एक वर्ष पीछे प्रकाशित होता है। वर्ष 2011 का अंक अन्य वर्षाें की अपेक्षा अधिक पठनीय और संग्रहणीय है। विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है।

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