मौसम से न ‘टकराना’ बचके आना-जाना

Banda Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
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dlअमर उजाला ब्यूरो
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बुंदेलख्ांड। गर्मी के तेवर बहुत तल्ख हैं, इसे हलके में लेने की गलती न करें। मौसम के मिजाज को देखते हुए घर से संभल कर निकले। आसमान से आग बरस रही है। ऐसे में शरीर को नियंत्रित करने वाला सिस्टम फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर एहतियात नहीं बरती तो लीवर, किडनी, हार्ट और मधुमेह रोगियों िक परेशानी बढ़ जाएगी। शरीर में पानी की कमी समस्या और बढ़ा देती है। डॉक्टरों का कहना है कि इनसे बचने के लिए खानपान, रहन-सहन और जीवन शैली में बदलाव लाने की जरूरत है। वरिष्ठ फिजीशियन डा.एचडी त्रिपाठी का कहना है कि अधिक गर्मी बढ़ने और लू की चपेट में आने से शरीर के तापमान को नियंत्रित करने वाला सिस्टम फेल हो सकता है। सिस्टम फेल होने से जान तक जा सकती है। लीवर रोगों के मरीजों के शरीर में पानी की कमी होने से दिक्कत बढ़ जाती है। पेशाब का रंग पीला हो जाता है। पसीना ज्यादा निकलने से शरीर में पानी की कमी होती है जिससे गुर्दे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पुराने रोगियों के गुर्दे फेल हो सकते हैं। वरिष्ठ नेत्र रोग चिकित्सक डॉ एसपी गुप्ता ने बताया कि तपिश में हवा सूखी होती है, जिससे आंखों की नमी कम होती है और व्यक्ति को ड्राई आई की दिक्कत बढ़ जाती जाएगी। इससे आंखों में जलन, छोटे दाने, अल्सर हो सकता है।
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