बिल्हरका गांव के बच्चों में कुपोषण का प्रकोप

Banda Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
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नरैनी। गरीबी, तंगहाली और भुखमरी से गुजर रहे बिल्हरका गांव के लगभग एक दर्जन परिवारों के बच्चे कुपोषण के शिकार हो गए हैं। ये सब दलित या पिछड़ी जाति के हैं। दस्यु प्रभावित इस गांव में भरपेट भोजन और संतुलित अहार न मिल पाने से इन बच्चों को कई बीमारियों ने जकड़ रखा है।
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मध्य प्रदेश की सरहद पर केन नदी किनारे बसे बिल्हरका गांव की आबादी लगभग तीन हजार है। सभी परिवारों का गुजर-बसर खेती किसानी पर है। कृषि भूमि का अधिकांश हिस्सा असिंचित है।
उपज कम होने से अधिकांश परिवार गरीबी का दंश झेल रहे हैं। इन परिवारों के बच्चों को भर पेट भोजन और पोषक तत्व न मिलने से उन्हें कुपोषण ने घेर लिया है। देवीदीन पाल की संतानें धर्मपाल (5), मालती (3) और विनीता (डेढ़ वर्ष), छोटे की संतान नीरज (4) व लीलावती (2), विशाल का पुत्र मनीष (4), बिज्जू की पुत्री अनीता (2), मंगलपाल का पुत्र कालकादीन (2), दयाराम का पुत्र सचिन (3), कमलेश का पुत्र रोहित (4), द्वारिका का पुत्र वीरेंद्र (6), छोटे की पुत्री सुनीता (18) और कामता की पुत्री रेखा (17) आदि कुपोषण के शिकार हैं। इनका शारीरिक और मानसिक विकास रुक गया है। ये नई दुनिया मोहल्ला में रहते हैं। आए दिन इन्हें कोई न कोई बीमारी घेरे रहती है।
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