रोक हटी, राजघाट की दो बालू खदानें आबाद

Banda Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
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बांदा। एक माह से भी अधिक समय से वीरान पडे़ बालू घाट फिर आबाद हो गए। सख्ती से रोक लगाने वाले अफसर नरम पड़ गए। नतीजे में मुख्यालय की सीमा से जुडे़ राजघाट में बालू खनन की धमाचौकड़ी भरी रौनक फिर लौट आई। ट्रकों की लाइन लग गई। ओवरलोडिंग भी शुरू हो गई।
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ओवर लोडिंग और अवैध खनन की चौतरफा हो रहीं शिकायतों के बीच जिलाधिकारी ने खुद अफसरों के लाव-लश्कर के साथ अप्रैल माह में केन नदी किनारे राजघाट स्थित बालू घाट में छापा मारा था। कई ट्रकों को सीज कराया था। 28 अप्रैल से सभी खदानों पर रोक लगा दी गई थी। कहा गया था कि खनन स्थल की नाप कराई जाएगी ताकि पता चल सके कि पट्टे से अधिक क्षेत्रफल में तो खनन नहीं हो रहा। बालू पर पूरी तरह से रोक लग जाने से सरकारी निर्माण कार्य तो बाधित हुए ही आम लोगों को भी काफी परेशानी हुई। बालू के भाव कई गुना बढ़ गए। ट्रैक्टर ट्राली एक हजार से बढ़कर साढे़ तीन हजार और ट्रक महानगरों में 30 हजार से बढ़कर एक लाख रूपए हो गया था।
अंतत: खदान ठेकेदारों की कोशिशें रंग लाईं और प्रशासन ने खनन की अनुमति दे दी। नतीजे में राजघाट स्थित हटेटीपुरवा व लड़ाकापुरवा की दो पट्टे वाली खदानों पर खनन से प्रतिबंध हटा लिया गया है। जिला खनिज अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर खनन की अनुमति दी गई है। खदान की नाप हो गई है। अवैध खनन नहीं होगा। खनन स्थल वाले दो पट्टे 10-10 एकड़ के हैं।
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