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हरियाली हटाने का खेल ही रुला रहा

Banda Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
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बांदा। बुंदेलखंड में जो सूखे की भयावह स्थिति का सामना है उसके पीछे यहां की हरियाली का खात्मा है। आज भी अगर हम सचेत हो जाएं तो आने वाली पीढ़ी को हरा-भरा वातावरण दे सकते हैं। यह बात विश्व पर्यावरण दिवस पर बुंदेलखंड के मशहूर इंजीनियरिंग कालेज कालीचरण निगम इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालॉजी (केसीएनआईटी) में आयोजित गोष्ठी में कही गई। इस मौके पर इस साल केसीएनआईटी ने 1000 पौधे लगाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया।
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केसीएनआईटी में आयोजित गोष्ठी में डायरेक्टर डा.विश्राम शर्मा और डीन प्रो.राकेश श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि धरती के चेहरे को ढाकने वाली हरियाली को हटाकर अपने प्रकृति से जो खिलवाड़ किया था अब वही हमें रुला रहा है। 100 साल पहले धरती का लगभग 30 फीसदी हिस्सा वनों से हरा-भरा था। आज यह सिर्फ 14 प्रतिशत बचा है। यह सब हमारी लापरवाही का नतीजा है। बुंदेलखंड में अक्सर सूखे के हालात की वजह भी यही है।

इस मौके पर इंस्टीट्यूट के प्लेसमेंट अधिकारी श्यामजी निगम ने कहा कि वृक्ष हमें प्राण वायु के रूप में आक्सीजन देते हैं। अगर धरती से इनका ही सफाया हो गया तो हमें जिंदा रहने के लिए आक्सीजन कहां से मिलेगी। कम से कम अपने लिए हमें आक्सीजन की व्यवस्था खुद करनी ही चाहिए। अपने जीवनकाल में हमें न्यूनतम 10 पेड़ अवश्य लगाना चाहिए। इस अवसर पर इंस्टीट्यूट परिसर में पौधे भी लगाए गए। साथ ही यह भी बताया गया कि अगले एक साल के लिए 1000 पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है। सब मिलकर इसे पूरा करेंगे।

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