बुंदेलखंड की हरियाली के नाम पर ठिकाने लगे दो सौ करोड़

Banda Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
रशीद सिद्दीकी
बांदा। बुंदेलखंड को हरा-भरा बनाने को सरकारें पानी की तरह पैसा बहाती रहीं पर यहां से हरियाली नदारद है। पांच साल में समूचे बुंदेलखंड में पौध रोपण पर 200 करोड़ से ज्यादा खर्च किए गए। वन विभाग की फाइलों में लगभग 16 करोड़ पौधे लगाए गए। बावजूद, इसके किसी भी जिले में छह फीसदी से ज्यादा वन नहीं है।
पहाड़ों और चटियल मैदानों के लिए ही बुंदेलखंड जाना जाता है। पथरीली धरती पर पेड़-पौधे कम हैं। इसे हरा-भरा बनाने की मंशा से केंद्र और प्रदेश सरकारें समय-समय पर पौधारोपण को बढ़ावा देती रहीं। इस पर भरपूर पैसा खर्च किया गया। न सिर्फ वन विभाग बल्कि अन्य विभागों और ग्राम पंचायतों को भी पौधे लगाने की जिम्मेदारियां सौंपी गईं। मनरेगा से भी पौधे लगाए गए। बसपा सरकार में एक करोड़ पौधे बुंदेलखंड में लगाने का दावा किया गया था लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।
बुंदेलखंड में पौध रोपण के आंकडे़ चौंकाने वाले हैं। जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत आशीष सागर ने वन विभाग से जो आंकड़े इकट्ठा किए हैं, उनके मुताबिक वर्ष 2005 से 2012 तक वन विभाग बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन और झांसी जिलों में लगभग 200 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। इस रकम से 15 करोड़ 91 लाख 54 हजार 117 पौधे लगाने का दावा किया है। फाइलों में लगे ये पौधे अगर धरती पर होते हो शायद तस्वीर कुछ और होती।

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