...और नसबंदी में पुरुषों ने बाजी मारी

Banda Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
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बांदा। सरकारी कार्यक्रमों की जागरूकता का परिणाम कहे या लोगों में जिम्मेदारी का अहसास क्योंकि नसबंदी कराने में पुरुषों ने महिलाओं से बाजी मारी है। हालांकि पिछले दो महीने के ये परिणाम हैं लेकिन इसे अच्छी शुरुआत कहा जा सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले के आंकड़ों में नसबंदी आपरेशन कराने में हमेशा महिलाएं ही आगे रहा करती थीं।
परिवार नियोजन को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि अब बढ़ती महंगाई को देखते हुए हर परिवार एक या दो बच्चों की जिम्मेदारी ही उठाने की चाह रख रहा है। परिवार नियोजन के तमाम उपायों में नसबंदी अच्छा विकल्प रहा है। हालांकि तमाम भ्रांतियों के चलते नसबंदी कराने से ज्यादातर पुरुष हमेशा कटा करते थे और वे महिलाओं को आपरेशन कराने के लिए प्रेरित करते थे। ऐसे में हमेशा से इस ‘उपाय’ को अपनाने में महिलाएं आगे रहीं लेकिन बदलते समय के साथ स्थितियां भी बदल रही हैं। पिछले दो वर्षों के नसबंदी आपरेशनों की संख्या पर नजर डाले तो यह बात साफ हो जाएगी। वर्ष 2010 में 4209 और 2011 में 3351 नसबंदी आपरेशन हुए इनमें वर्ष 2010 में 4165 महिलाओं और महज 44 पुरुषों ने आपरेशन करवाए थे। इसी तरह वर्ष 2011 में आपरेशन करवाने वाली महिलाओं की संख्या 3345 थी वहीं पुरुष महज 6 ही थे। इसके उलट परिणाम चालू वित्तीय वर्ष के दो महीनों में दिख रहे हैं। पहली अप्रैल से अब तक होने वाले 15 नसबंदी आपरेशनों में महिलाओं की संख्या जहां चार है वहीं पुरुषों की संख्या 11 रही है।

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