छिपी हुई प्रतिभा को निखारें

Banda Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
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बांदा। स्टेडियम में चल रही 15 दिवसीय कार्यशाला में रविवार को जीवन के कौशल सिखाए गए। कई छात्र-छात्राओं ने इसमें भाग लिया। उन्हें जीवन कौशल की उपयोगिता बताई गई।
कार्यशाला संयोजक नसीर अहमद सिद्दीकी ने बताया कि जीवन के 10 प्रमुख कौशल हैं। इनमें आत्म सजकता, समानुभूति, प्रभावशाली संप्रेषण, आपसी संबंध, रचनात्मक सोच, भावनाओं और तनाव का सामना करना, निर्णय लेना और समस्या का समाधान करना शामिल है। हर व्यक्ति को अपने अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारना चाहिए। हनुमान का उदाहरण दिया कि जब उन्हें उनकी ताकत के बारे में बताया गया तो वह समुद्र लांघ गए। जो अपनी बात बताने में सक्षम होते हैं वह नायक बन जाते हैं यानि प्रभावी संप्रेषण वाले व्यक्ति जीवन में तेजी से बढ़ते हैं। रचनात्मक व गंभीर सोच वालों की कद्र होती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में किसी नौकरी के लिए साक्षात्कार देते समय उपरोक्त जीवन कौशलों को आधार मानकर अभ्यर्थी को जांचा-परखा जाता है। जो युवक जितने ज्यादा कौशलों में खरा उतरता है उतना बड़ा पैकेज पाने में सफल होता है।
थियेटर एजूकेशन कार्यशाला में भाग ले रहीं शालू वर्मा ने कहा कि बांदा के लिए यह कार्यशाला सौभाग्य की बात है। हमारे लिए उपयोगी साबित होगी। एक अन्य प्रशिक्षार्थी आदिल को भरोसा है कि इस कार्यशाला से निपुण बनने के बाद उसे ‘ज्ञानदर्शन’ चैनल में जरूर मौका मिलेगा। कार्यशाला में युवाओं को यह गुर नि:शुल्क सिखाए जा रहे हैं।

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