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ऐतिहासिक तालाबों का अस्तित्व संकट में

Banda Updated Fri, 01 Jun 2012 12:00 PM IST
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मटौंध। प्रशासन की उपेक्षा से कई ऐतिहासिक तालाबों का अस्तित्व संकट में है। नगर पंचायत भी इनके रखरखाव को तवज्जो नहीं दे रही। दूसरी ओर आसपास रहने वाले तमाम लोगों ने अतिक्रमण कर भीटों पर मकान बना लिए।
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कसबे के आसपास सात बीघा से लेकर 110 बीघा रकबा तक के तालाब हैं। इनमें शुक्ला तालाब 71 बीघा, भुजा तालाब 110 बीघा, लहरवा तालाब 50 बीघा, नवा तालाब 25 बीघा, नैनी तालाब 15 बीघा और हरिहर तालाब का रकबा सवा सात बीघा है। हरिहर तालाब नगर पंचायत की सीमा पर है। बाकी अन्य तालाब मटौंध ग्रामीण क्षेत्र में है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर नगर पंचायत कार्यालय से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित इस तालाब को कभी तवज्जो नहीं दी गई। तालाब के आसपास के बाशिंदो ने कूड़ा-कचरा डालकर पुराई कर ली। कीचड़ युक्त पानी में सड़ांध फैल रही है। तालाब के कुछ हिस्से में नगर पंचायत ने कांजी हाउस, सुलभ कांप्लेक्स और पार्किंग शुल्क अड्डा बना रखा है।उधर, मटौंध ग्रामीण क्षेत्र में शामिल तालाबों का भी कोई पुरसाहाल नहीं है। भुजा तालाब, नवा तालाब और नैनी तालाब अतिक्रमण की गिरफ्त में है। भीटों पर तमाम मकान बन गए। झाड़ियों की बाड़ लगाकर अवैध कब्जा जारी है। भुजा तालाब में मत्स्य पालकों द्वारा तरह-तरह के केमिकल डालने से पानी मवेशियों के पीने का काबिल नहीं रहा। डा.संतोष कुमार शुक्ला, नरेंद्र तिवारी, जगदेव सिंह, पारथ कुमार, मनोज वर्मा आदि ने अतिक्रमण हटाकर तालाबों के सुंदरीकरण की मांग की है।

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