फ्लाप हो गई स्वच्छ शौचालय योजना

Banda Updated Wed, 30 May 2012 12:00 PM IST
नरैनी। पंचायती राज विभाग के माध्यम से गांवों में बनाए गए स्वच्छ शौचालयों की हकीकत सत्यापन के दौरान सामने आ रही है। पांच वर्षाें पूर्व लागू हुई योजना में लाभार्थियों को दी गई रकम का लेखाजोखा और अधिकांश शौचालय ढूंढे नहीं मिल रहे। गौरतलब है कि शौचालयों की जांच-पड़ताल डीएम के आदेश पर हो रही है।
केंद्र सरकार की यह योजना वर्ष 2003 में लागू हुई थी। अब लाभार्थियों को शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि के रूप में 500 रुपए दिए गए थे। बाद में यह राशि 2004-05 में बढ़ाकर 1500 रुपए कर दी गई। वर्ष 2008-09 में 2200 रुपए और वर्ष 2011-12 में 3200 रुपए लाभार्थी के खाते में भेजे गए। जांच में पता चल रहा है कि शुरूआत पांच वर्षाें में 10 फीसदी शौचालय भी नहीं बने। ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर बंदरबांट कर लिया। अधिकांश मामले ऐसे हैं कि लाभार्थी को पता भी नहीं चला और उसके नाम से धनराशि जारी कर दी गई। जांच-पड़ताल मंे पता चला है कि कुछ लाभार्थियों ने शौचालय बनवाए ही नहीं तो बहुतों ने अधूरे छोड़ दिए।
नरैनी ब्लाक की 77 ग्राम पंचायतों में लगभग 50 फीसदी की जांच-पड़ताल पूरी हो चुकी है। जांच रिपोर्ट पंचायत विभाग को दी जा चुकी है। उधर, लाभार्थियों की माने तो जितनी राशि दी जा रही है उतने में शौचालय नहीं बन सकता।

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