फिल्टर न हो तो केन का पानी तो पीने योग्य नहीं

Banda Updated Fri, 25 May 2012 12:00 PM IST
बांदा। शहर के एक लाख से भी ज्यादा बाशिंदे जिस केन नदी का पानी पी रहे हैं वह पीने योग्य नहीं है। नदी को गंदे नालों ने प्रदूषित कर दिया है। 100 मिलीलीटर पानी में एक लाख बैक्टीरिया मौजूद हैं। जबकि इनकी अधिकतम संख्या 50 हजार होनी चाहिए। अलबत्ता जल संस्थान ने फिल्टर पंप के जरिए इसे पीने योग्य बना देने का दावा किया है। शहर के कई उन कुआें का भी यही हाल है, जिससे जलापूर्ति की जा रही है।
केन नदी में बांदा शहर से लेकर दर्जनों गांवों की लाशें बहाई जाती हैं। कई नाले इसमें जुडे़ हुए हैं। नतीजे में नदी का पानी प्रदूषित है। जल संस्थान के लैब की परीक्षण रिपोर्ट बताती है कि नदी के पानी में बैक्टीरिया बहुत है। बिना फिल्टर पानी संक्रामक रोग पैदा कर सकता है। भूरागढ़ स्थित जल संस्थान की प्रयोगशाला में 100 मिलीलीटर पानी में एक लाख बैक्टीरिया पाए गए। साथ ही पानी में हार्डनेस (कठोरता) बहुत है। इससे गुर्दे की पथरी का खतरा रहता है। प्रयोगशाला के कैमिस्ट डा.एसके मिश्रा का कहना है कि फिल्टर के बाद पानी पीने योग्य हो जाता है। किसी तरह की बीमारी का कोई खतरा नहीं है। इसी तरह अलीगंज स्थित कुएं के पानी में हार्डनेस ज्यादा पाई गई है। कई मोहल्लों में यहां से आपूर्ति की जाती है। सब्जी मंडी आनंद कुआं का पानी भी गंदा है। डा.मिश्रा बताते हैं कि पानी में डिजाल्वड सेल 500 मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। उन्होंने बताया कि पूरे मंडल में कहीं भी पानी में नाइट्रेट नहीं पाया गया। सीवर का पानी शामिल होने से ही नाइट्रेट बढ़ता है। क्योंकि मंडल में कहीं सीवर नहीं है इसलिए इसका खतरा नहीं है। अलबत्ता बारिश के मौसम में पानी प्रदूषित हो जाता है। तब ज्यादा एहतियात की जरूरत होती है। कानपुर की चीफ वॉटर एनालिस्ट डॉ. अमिता वाजपेयी का कहना है कि 100 मिलीलीटर पानी में अधिकतम 50 हजार बैक्टीरिया तक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह नहीं हैं। इससे अधिक बैक्टीरिया होने का अर्थ पानी का प्रदूषित होना और बीमारियों को न्यौता देना है।

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