बुजुर्ग शायर जौकी बांदवी का निधन

Banda Updated Thu, 24 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
बांदा। ‘ये दुनिया है यहां हिज्र का मातम क्यों है, आईने टूटते रहते हैं तुम्हें गम क्यों है।’ इस शेर के कहने वाले बुजुर्ग शायर जौकी बांदवी नहीं रहे। मंगलवार की शाम उनका निधन हो गया। बुधवार को उनके अंतिम संस्कार में शायर, साहित्यकार और राजनीतिक लोग शामिल हुए।
विज्ञापन

इशरत हुसैन उर्फ जौकी बांदवी लगभग 74 वर्ष के थे। उर्दू अदब की दुनिया में उनकी खासी शोहरत थी। मुशायरों की महफिल में तरन्नुम के साथ उनके कलाम गूंजते तो समां बंध जाता। अब यह आवाज थम गई। पद्माकर चौराहा स्थित अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी, कांग्रेस उपाध्यक्ष मोहम्मद इदरीस समेत शायर नश्तर, अहमद दिलनवाज, डा.इजहार खालिद, नजरे आलम इत्यादि ने जनाजे में शिरकत की। उधर, कांग्रेस कार्यालय में शोक सभा हुई। इस मौके पर शायर जौकी बांदवी को श्रद्धांजलि दी गई। जिलाध्यक्ष साकेत बिहारी मिश्र, स्थाई सचिव शिवबली सिंह, हसरत फरीदी, सुकदेव गांधी, हरिश्चंद्र वाजपेयी, सुधीर खरे कमल, राजकुमार सिंह आदि शोक सभा में शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us