‘मातृ दिवस’ पर मां बनीं कई

Banda Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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बांदा। मां की ममता जग जाहिर है लेकिन ‘मातृ दिवस’ पर मां बनना कितना सुखद अहसास देता है, यह कोई मां ही बयां कर सकती है। जिले में कई मां ने अपने अहसास साझा किए। बच्चे के जन्म के बाद उनके चेहरे की चमक देखने लायक थी। अपनों ने बधाइयां दी और मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया।
पिपरहरी गांव की 22 वर्षीय रुचि पत्नी कृष्णा महिला अस्पताल में भर्ती है। मातृ दिवस के मौके पर तड़के 4 बजकर 20 मिनट पर उसने पुत्र को जन्म दिया। उसका यह पहला प्रसव है। काफी खुश नजर आ रही रुचि ने कहा कि मातृ दिवस पर मां बनने का सुखद एहसास हो रहा है। उसकी इच्छा थी कि ऐसे समय में बच्चा हो जिसका कुछ खास महत्व हो। उसकी तमन्ना पूरी हो गई। ससुराल वाले भी खुश हैं। फोन पर बधाइयां मिल रही हैं।
इसी तरह बड़ोखर बुजुर्ग गांव की 22 वर्षीय सुनीता पत्नी अशोक कुमार ने भी मातृ दिवस पर सुबह 10 बजकर 25 मिनट पर अस्पताल में पुत्र को जन्म दिया। खुशी में ससुराल और मायके वालों ने मिठाइयां बांट दीं। सुनीता को बाद में पता चला कि वह मातृ दिवस पर मां बनी है। मातृ दिवस पर कुछ और महिलाओें ने भी बच्चों को जन्म दिया है। इनमें दुरेड़ी गांव की गीता (32) पत्नी हरीकरन ने पुत्र को जन्म दिया। यह उसका चौथा बच्चा है।
बिलगांव की रेखा (26) पत्नी कामता ने पुत्री और पल्हरी गांव की उमाकांती (30) पत्नी सुरेश कुमार ने पुत्र को जन्म दिया। यह सब महिला अस्पताल में भर्ती हैं।

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