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‘आरक्षण पर रोक का जल्दबाजी में फैसला’

Banda Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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बांदा। राष्ट्रीय दलित महासभा ने संविधान में संशोधन करके अनुसूचित जाति/जनजाति और पिछड़ा वर्ग कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की मंाग की है। कहा है कि उच्च न्यायालय के आदेश को उत्तर प्रदेश सरकार ने जल्दबाजी में लागू कर दिया है जबकि संसद में यह मुद्दा संविधान संशोधन के रूप में लंबित है।
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बुधवार को यहां जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश के राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में महासभा अध्यक्ष ने कहा है कि पदोन्नति आरक्षण खत्म करने के मामले में संविधान के तहत केंद्र व राज्य सरकारें प्रथम नियुक्ति के साथ-साथ पदोन्नति देते समय भी आरक्षण सुविधा देती रही हैं। मात्र नौकरी पा जाने से सामाजिक न्याय का सपना पूरा नहीं होता। सरकारी नौकरी में मनुवाद हावी है इसलिए आरक्षण की व्यवस्था जरूरी है। उच्च स्तरीय प्रमोशन कमेटियां हैं, जिनमें आरक्षण न होने से दलितों के विकास में बाधा आती है। महासभा ने मांग की है कि राज्य सरकार अपने फैसले पर विचार करके इसे वापस ले। ज्ञापन देने वालों में बुंदेलखंड प्रभारी सुल्तान मेहंदी, बिंदा प्रसाद, विजयकरन भारतीय आदि शामिल थे।
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