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प्यासे मवेशियों के लिए चली नहर

Banda Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
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बांदा। धूल उड़ा रहीं नहरों में अब पानी दिखने लगेगा। दरअसल बृहस्पतिवार को बांधों में बचा-खुचा पानी नहरों के हवाले कर दिया गया। इससे पशुओं को पीने का पानी मुहैया कराने के लिए तालाब और पोखर भरे जाएंगे। नहर सात मई तक चलेगी। हालांकि सख्त निर्देश हैं कि इस पानी का सिंचाई के काम में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। यह केवल पशुओं की प्यास बुझाने के लिए है। सिंचाई के लिए नहर काटने पर कार्रवाई की जाएगी।
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गौरतलब है कि गंगऊ, रनगवां और बरियारपुर बांध कई माह पहले ही डेड स्टोर हो चुके हैं। गंगऊ और बरियारपुर की तलहटी पर पानी है। अलबत्ता रनगवां में 180 एमसीएफटी (वर्ग मिलियन घनफिट) पानी सुरक्षित रखा गया है। यह गर्मी में पशुओं की प्यास बुझाएगा। सिंचाई विभाग ने पूर्व निर्धारित रोस्टर के मुताबिक पहली मई को मुख्य केन नहर शुरू कर दी। फिलहाल 2.9 फिट (490 क्यूसिक) पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। तीसरे दिन पानी अतर्रा और बांदा ब्रांचों तक पहुंच गया। बांदा शहर के इर्दगिर्द नहर में पानी ने दस्तक दे दी है। शुक्रवार तक यह और बढे़गा।

गंगऊ बांध में 122.69, बरियारपुर में 77.85 और रनगवां में 180 एमसीएफटी पानी उपलब्ध है। बांधों के इस पानी से सिंचाई विभाग ने 415 तालाब, पोखर और गड्ढे भरने का दावा किया है। बीते साल 492 तालाब और पोखर भरे गए थे। सिंचाई विभाग अधीक्षण अभियंता एके शर्मा ने बताया कि नहरों में छोड़े गए पानी से सिंचाई हरगिज नहीं की जा सकेगी। यह सिर्फ मवेशियों की प्यास बुझाने को है। नहर काटना भी जुर्म होगा।

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