तिलौसा गांव में तबाही की निशानियां

Banda Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
बबेरू/कमासिन। तिलौसा गांव में आग तो बुझ गई लेकिन तबाही की निशानियां छोड़ गई। बसा-बसाया गांव वीरान नजर आ रहा है। खलिहानों से कई जगह अभी धुआं थमा नहीं है। मकान गंवा चुके ग्रामीण खेतों में डेरा डाले हैं। उधर, प्रशासन ने फौरी तौर पर फिलहाल 2700-2700 रुपए की आर्थिक सहायता मुहैया कराई है। हालांकि पीड़ितों ने उसे नाकाफी बताया है।
सोमवार को लगी आग में 102 मकान मय सामान और 44 किसानों की फसल राख के ढेर में तब्दील हो गई। दमकलों को भीषण आग बुझाने में दांतों पसीने आ गए।
आग तभी थमी जब सब कुछ खाक हो गया। मंगलवार को दूसरे दिन भी जगह-जगह धुआं उठता रहा। दहशतजदा ग्रामीण अपना बचा-खुचा अपना सामान लेकर खेतों में डेरा डाले हैं। तहसीलदार एसएन त्रिपाठी का कहना है कि आग पूरी तरह बुझा दिए जाने के बाद ही दमकल गाड़ियां यहां से वापस जाएंगी।
उन्होंने बताया कि फौरी तौर पर पीड़ितों को 2700-2700 रुपए के चेक दिए गए हैं ताकि वह अपने खाने-पीने की व्यवस्था कर सकें। कच्चे मकानों को 15 और पक्के मकानों को 35 हजार रुपए दिए जाएंगे। दूसरी ओर पीड़ितों ने मिली सरकारी सहायता को नाकाफी बताते हुए रोष जताया है। हालांकि कई लोग उनकी मदद को जुटे हुए हैं।
उधर, ग्राम प्रधान संघ के कल्लू लाल यादव और देवेंद्र शुक्ला, धनंजय करवरिया, पप्पू सिंह, सौखीलाल आदि प्रधानों ने कहा है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई मदद नहीं मुहैया कराई गई है। न ही खाने-पीने की कोई व्यवस्था की गई है। यह सरासर लापरवाही है। अनुमान है कि इस भीषण अग्निकांड में एक करोड़ की संपत्ति राख हुई है।

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