समता मूलक व भेदभाव मुक्त शिक्षा की वकालत

Banda Updated Mon, 01 Dec 2014 05:30 AM IST
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बांदा। अखिल भारत शिक्षा अधिकार मंच की अगुवाई कर रहीं डॉ.स्वाती वाराणसी से जुड़ी हैं। एक खास मकसद से देश की यात्रा पर निकलीं शिक्षिका डॅा. स्वाती का उद्देश्य है कि संविधान में निहित समता मूलक व भेदभाव से मुक्त शिक्षा हो। शनिवार शाम वह प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह के बड़ोखर गांव स्थित कृषि फार्म में कुछ देर के लिए रुकी थीं।
इस दौरान ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में उन्होंने राजस्थान के एक गांव का उदाहरण दिया। बताया कि वहां एक बालिका स्कूल में अहम विषयों के टीचर नहीं थे। स्कूल की 10 बालिकाएं पैदल बीडीओ दफ्तर गईं और वहां धरने पर बैठ गईं। बीडीओ तो नहीं मिले, पर एसडीएम ने उन्हें 10 दिन में टीचर तैनात करने का भरोसा दिया। दिन बीत गए टीचर तैनात नहीं हुए। तब तक इन बालिकाओं के साथ गांव के सैकड़ा भर लोग जुड़ चुके थे। 10 दिन बाद सभी डीएम के दफ्तर में धरने पर बैठ गए। डीएम ने तीन दिन में टीचरों की तैनाती कर दी। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा का मकसद समाज को जागरूक करना है। यदि सभी के दिलो दिमाग में यह बात बैठ जाएगी तो उनके आंदोलन को जरूर सफलता मिलेगी। एक दिन पूरे देश में कामन स्कूल होंगे। यहां मंत्री से लेकर किसान तक के बच्चे शिक्षा ग्रहण करेंगे। कामन शिक्षा के लिए नई उदारवादी नीतियों को ध्वस्त करना होगा। शिक्षा वैश्विक बाजार की लूट के लिए गुलाम कामगार बनाने का जरिया कतई नहीं है। बल्कि यह जनता की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक जरूरतों को पूरा करने और प्रबुद्ध समाज के निर्माण का सशक्त माध्यम है।

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