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मिल में क्या बचा, किसी को नहीं पता

Banda Updated Thu, 06 Nov 2014 05:30 AM IST
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बांदा। बुंदेलखंड की इकलौती बंद हो चुकी यार्न कंपनी (कताई मिल) की हालत से यार्न कंपनी के अफसर ही अनजान हैं। उन्हें नहीं पता कि बंद पड़ी मिल में कितनी मशीनें और उपकरण हैं? कौन सी मशीनें चोरी हो गई हैं? अलबत्ता यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि मिल में कोई कर्मचारी कार्यरत न होने से आरटीआई में मांगी गई सूचना देना संभव नहीं है।
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आरटीआई एक्टिविस्ट समाजसेवी कुलदीप शुक्ला ने जन सूचना अधिकारी अधिनियम के तहत यूपी स्टेट यार्न कंपनी लिमिटेड, कानपुर से पांच बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। पूछा था कि मिल चालू रहते समय कौन-कौन से उपकरण या मशीनें लगे थे? अब कौन सी मशीनें और उपकरण बचे हैं? कंपनी के जन सूचना अधिकारी जेपी दुबे ने उपलब्ध कराई सूचना में कहा है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम-1947 के तहत मिल विधिक रूप से 10 फरवरी 2000 से बंद हो चुकी है। उसी तिथि से सभी कार्मिकों की सेवाएं स्वत: समाप्त हो गई हैं। कोई कंपनी का कोई कार्मिक कार्यरत नहीं है। जनसूचना अधिकारी ने यह भी कहा है कि वह तकनीकी विशेषज्ञ नहीं है। न ही अभिलेख उपलब्ध हैं। जिससे वह बता सकें कि कौन सी मशीनें और उपकरण हैं या नहीं हैं? मिल मेें कंपनी का कोई कर्मचारी भी कार्यरत नहीं हैं इसलिए वांछित सूचना नहीं दी जा सकती।
चोरी के बारे में जनसूचना अधिकारी ने कहा है कि यह सूचना भी दे पाना संभव नहीं है क्योंकि कर्मचारी वहां नहीं है। अलबत्ता वर्ष 2007 से आज तक मिल की कोई परिसंपत्ति चोरी नहीं हुई है। मिल की सुरक्षा में प्रदेश शासन के निर्देश पर आठ पूर्व सैनिक सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। मिल की कुल भूमि 90.43 एकड़ है।
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सरकार ने तीन माह की मांगी मोहलत
बांदा। बंद कताई मिल को चालू करने के लिए कताई मिल मजदूर मोर्चा लगातार आंदोलन कर रहा है। साथ ही कानूनी लड़ाई भी लड़ रहा है। मोर्चा अध्यक्ष राम प्रवेश यादव ने बताय कि औद्योगिक वित्तीय पुर्निर्माण बोर्ड (बायफर) में यह मामला विचाराधीन है। पिछले माह 14 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष सचिव ने बोर्ड को लिखित भरोसा दिलाया है कि वह बंद पड़ी कताई मिलों के बारे में संशोधित एमडीआरएस बोर्ड में प्रस्तुत करेंगे। इसके लिए प्रदेश सरकार ने बोर्ड से तीन माह की मोहलत मांगी। बोर्ड ने इसे स्वीकारते हुए मोहलत दे दी और अगली सुनवाई 5 फरवरी 2015 को निर्धारित की है। ब्यूरो
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मिल चालू करने के लिए सीएम को भेजा ज्ञापन
बांदा। बुंदेलखंड लोकतांत्रिक सेना ने ज्ञापन भेजकर मुख्यमंत्री से बांदा की बंद पड़ी कताई मिल पुन: चालू करने की मांग की है। कहा है कि बांदा में कोई उद्योग नहीं है। बेरोजगार पलायन कर रहे हैं। बुंदेलखंड की इकलौती मिल को चालू करने से बेरोजगारों को रोजी-रोटी मिलेगी। बुधवार को सिटी मजिस्ट्रेट के माध्मय से भेजे ज्ञापन में कहा है कि शासन ने प्रदेश की मगहर, नगीना, बुलंदशहर, बहादुरगंज, कपिल, अमरोहा, बड़ेही, फतेहपुर और मऊआईमा की बंद मिलों को फिर चालू कराने का निर्णय लिया है। पिछड़े बुंदेलखंड की बांदा मिल को चालू न किया जाना अत्यंत सोचनीय बात है। मिल चालू होने से सरकार की छवि बेरोजगारों व यहां के लोगों में सुधरेगी। ज्ञापन देने वालों में जिला संयोजक रवि कुशवाहा, महासचिव प्रशांत समुद्रे सहित शशिकांत निराला, दिलीप कुमार, जावेद खान, डॉ.विनोद कुमार, संतोष, बबलू रैकवार, रामऔतार महतो, फूलचंद्र आदि शामिल रहे। ब्यूरो
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