सूखी रोटी, उबली लौकी से ‘जननी’ की सुरक्षा

Banda Updated Thu, 08 May 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
बांदा। प्रसूता महिलाओं व उनके शिशुओं को एनआरएचएम योजना से भले ही कोई लाभ न मिले पर इनके भोजन, दवा व जांच के नाम पर शासन से मिले करोड़ों रुपये का अफसरों ने वारा-न्यारा कर दिया। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत सरकारी अस्पतालों में सवा दो करोड़ और जननी सुरक्षा में 12 करोड़ रुपये ठिकाने लगा दिए गए। प्रसूता महिलाएं अस्पतालों में सूखी रोटी और उबली लौकी से सेहत बना रही हैं।
विज्ञापन

योजना के तहत शहर व ग्रामीण महिलाओं को प्रसव के दौरान सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाना और भोजन, जांच, दवा के साथ उन्हें प्रोत्साहन राशि देकर अस्पताल से डिस्चार्ज करना है। जिला महिला अस्पताल में प्रसव पीड़ा व अव्यवस्थाओं से कराह रही महिलाओं व उनके तीमारदारों ने यहां की सारी पोल खोल दी। प्रसूता को सामान्य प्रसव में तीन दिन तक सुबह नाश्ता, दोपहर में खाना (दाल, चावल, सब्जी रोटी व सलाद) तथा रात में खाना (सब्जी-रोटी व सलाद, दूध) का प्राविधान है। आपरेशन डिलीवरी में 7 दिन तक यह सुविधा मिलनी चाहिए। समाजवादी एंबुलेंस से घर से लाने और पहुंचाने की भी सुविधा है। महिला अस्पताल में प्रसव कराने आई मटौंध निवासी मइकी ने बताया कि बेड खाली न होने से डिलीवरी के 24 घंटे के अंदर उसे शिशु समेत बरामदे में लिटा दिया गया। खाने के नाम पर कुछ नहीं मिला। उधर, आपरेशन से बच्चा जन्म देने के बाद बरामदे में पड़ी पाली (बबेरू) गांव की मीरा ने बताया कि पति घर से खाना लाते हैं। प्रसूताओं को भोजन के नाम पर सिर्फ दो सूखी रोटी और लौकी की उबली सब्जी। सलाद के नाम पर सिर्फ खीरे के चंद टुकड़े दिए जा रहे हैं।
उधर, अस्पताल में अल्ट्रा साउंड मशीन सालों से खराब है। जांच व दवाओं के नाम पर बाहर के लिए पर्चा लिखा जाता है। प्रसूता महिलाओं को लेकर आने वाली आशा बहुओं को 600 रुपये मिलते हैं। उसमें से 250 रुपये मरीज के घर से आने-जाने व चाय-नाश्ता का 50 रुपये कट जाता है। आशा को सिर्फ 200 रुपये ही बचते हैं।
योजना में सवा दो करोड़ खपाए
बांदा। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसकेवाई) के तहत वित्तीय वर्ष 2014 में 2,25,28,745 रुपये शासन ने जारी किए। इसमें 57,95,000 हजार रुपये प्रसूता महिलाओं के भोजन, 43,69,147 रुपये प्रसूताओं की जांच और 1,23,64,000 हजार रुपये दवाओं के नाम पर ठिकाने लग गए।
पिछले वर्ष 5384 महिलाओं ने महिला जिला अस्पताल में प्रसव कराया। इसी तरह जननी सुरक्षा योजना में भी 12 करोड़ 3 लाख खपा दिए गए। 6 करोड़ 32 लाख रुपये प्रसव में खर्च हुए। घर पर प्रसव कराने वाली 5 महिलाओं को 500 की दर से 2500 प्रोत्साहन राशि दी गई। ग्रामीण महिलाओं को प्रसव बाद प्रति 1400 रुपये के हिसाब से 4 करोड़ 22 लाख 82 हजार रुपये बांट दिए। शहरी क्षेत्र में प्रति महिला 1000 की दर से 18 लाख 87 हजार 400 रुपये दिए गए। ऐसे ही आशा बहुओं को प्रति डिलीवरी 500 के हिसाब से एक करोड़ 47 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि दी गई।
तीमारदारों से वसूलती हैं भाड़ा
बांदा। गिरवां क्षेत्र के जरर की आशा बहू संध्या और मकरी (छिबांव) की आशा सुनैना ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना में एंबुलेंस में प्रसूता को अस्पताल पहुंचाने के बावजूद उनके प्रोत्साहन राशि से किराया-भाड़ा के नाम पर 250 रुपये काट लिया जाता है। मजबूरी में उन्हें यह किराया-भाड़ा तीमारदारों से वसूलना पड़ता है।
‘प्रसूता महिलाओं को मेन्यू के हिसाब से नाश्ता और दोपहर तथा रात में भोजन दिया जाता है। यदि दोपहर में सिर्फ लौकी की सब्जी व दो रोटी दी गई हैं तो इसकी जांच कराएंगी। शिकायत सही मिली तो कार्रवाई होगी। -अनीता सागर, प्रभारी सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us