पिता-पुत्र और भाइयों समेत छह को उम्रकैद

Banda Updated Wed, 07 May 2014 05:30 AM IST
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बांदा। 22 वर्षों पूर्व आपसी रंजिश में हुई युवक की हत्या के मामले में अदालत ने तीन सगे भाइयों समेत आधा दर्जन नामजद मुल्जिमों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 20-20 हजार रुपये जुर्माना भी किया गया है। इसी मामले में दूसरे पक्ष के 5 अन्य आरोपियों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
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गांवदारी को लेकर हत्या की यह घटना 13 जुलाई 1991 को नरैनी थाना क्षेत्र के पल्हरी गांव में हुई थी। यहां के दृगपाल सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए कहा था कि उसके 30 वर्षीय भाई संदीप सिंह की हत्या पहली अप्रैल 1991 को हो गई थी। इसमें मकरकंद, बलराम, लखना, नंगा उर्फ सदाशिव यादव व बुटुवा (निवासी गण कछियनपुरवा) और मान सिंह उर्फ चौधरिया, शिवनंदन व चुन्नू कहार पर हत्या का आरोप लगाया गया था। मकरकंदा, लखना, नंगा उर्फ सदाशिव व बलराम जमानत पर रिहा हो गए। साथ ही गवाहों को धमकाते रहे। इसी बीच 13 जुलाई 1991 को दृगपाल सिंह का छोटा भाई दिलीप सिंह अपने चचेरे भाई श्यामबाबू की सुरक्षा के लिए उसके साथ गांव के बाहर ट्यूबवेल में सोने गया था। तभी आधी रात के बाद उसकी गोली मार कर हत्या कर दी गई। दिलीप सिंह भी घायल हुआ। इस हत्या में भी संदीप की हत्या में शामिल रहे लक्ष्मण, मकरकंद, बलराम, बनवारी, नंगा उर्फ सदाशिव और भोगा नामजद किए गए।
तफ्तीश के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मंगलवार को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश बृजलाल चौरसिया ने 22 वर्ष पुराने इस मामले का फैसला सुनाया। अपने 6 पृष्ठीय आदेश में न्यायाधीश ने 80 वर्ष के उम्र दराज बलराम यादव और उसके पुत्र लक्ष्मण यादव, मकरंद और उसके भाई बनवारी पुत्रगण रामधार यादव, नंगा उर्फ सदाशिव यादव और उसके भाई भोगा पुत्रगण जगन्नाथ यादव (पल्हरी) को दोषी पाते हुए धारा 302/149 में आजीवन कारावास व 20-20 हजार रुपए जुर्माना, धारा 307 में 10-10 वर्ष की कैद और 5-5 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर सभी आरोपियों को 4-4 माह की अतिरिक्त कैद होगी। धारा 148 में दो-दो वर्ष की कैद से दंडित किया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने सुबूतों के अभाव में दृगपाल सिंह, अमर सिंह, दिलीप सिंह व चांद खां नट को बरी कर दिया। यह सभी परिवाद में आरोपी बनाए गए थे। इनकी पैरवी अधिवक्ता राजेंद्र सिंह ने की।
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