गेहूं खरीद केंद्रों पर नहीं टूट रहा सन्नाटा

Banda Updated Tue, 06 May 2014 05:30 AM IST
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बांदा। ईश्वर रूठा तो किसान टूटा। नतीजे में खरीद केंद्रों का सन्नाटा नहीं छूटा। बीते साल जहां खरीद केंद्रों में इन दिनों किसानों की भरमार थी वहीं अबकी केंद्रों में उल्लू बोल रहे हैं। पीसीएफ खरीद केंद्र में सिर्फ 15 कुंतल और आरएफसी में एक माह में मात्र 191 कुंतल गेहूं की खरीद हो पाई है। अबकी सरकारी गोदाम खाली रह जाने के आसार हैं।
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पहली अप्रैल से चालू हो चुके खरीद केंद्रों का सन्नाटा नहीं टूट रहा। इसके पीछे कुदरत की मार से खेतों में फसल न होना बताया जा रहा है। यहां मंडी समिति परिसर में आरएफसी और पीसीएफ के दो खरीद केंद्र एक माह से खुले हैं। अब तक मात्र 206 कुंतल खरीद हुई है। जबकि आरएफसी का खरीद लक्ष्य 13 हजार और पीसीएफ का 8 हजार कुंतल खरीद लक्ष्य निर्धारित है।
पीसीएफ केंद्र प्रभारी हेमंत कुमार और आरएफसी सहायक प्रभारी अजय कुमार ने बताया कि उपज कम होने से खरीद केंद्र आबाद नहीं हो पा रहे। इक्का-दुक्का किसान ही गेहूं बेचने आ रहे हैं। आरएफसी केंद्र में तीन दिन के बाद सोमवार को एक ट्रैक्टर गेहूं आया। दूसरी तरफ किसान सरकारी केंद्रों में बेचने के इच्छुक नहीं हैं। किसान अनंत कुमार (जमालपुर) ने आरोप लगाया कि खरीद केंद्रों में किसानों का शोषण हो रहा है। उन्हें बोनस नहीं मिलता। यहां 1400 रुपये कुंतल खरीद हो रही है और पड़ोसी मध्य प्रदेश में 1500 रुपये कीमत और 100 रुपये बोनस मिल रहा है।
केंद्रों में रखे गए पानी भरे टब
बांदा। गेहूं खरीद केंद्रों की वीरानगी तोड़ने के लिए खरीद केंद्रों में किसानों को कुछ अतिरिक्त सुविधाएं परोसी जा रही हैं। बैलगाड़ियों पर अनाज लेकर आने वाले किसानों को शिकायत होती थी कि उनके मवेशियों (बैलों) को पीने का पानी मयस्सर नहीं रहता। अबकी खरीद केंद्रों में मवेशियों की प्यास बुझाने के लिए पानी भरे टब की व्यवस्था की गई है। टबों में पानी खरीद केंद्र के मजदूर भरेंगे। साथ ही किसानों को भी केंद्रों में पीने का पानी मयस्सर होगा।
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