दरकीं दीवारें और उखड़े हैं प्लास्टर

Banda Updated Fri, 24 Jan 2014 05:48 AM IST
बांदा। दूसरों की नींद उड़ा देने वाले दरोगाओं की नींद भी उड़ रही है। पुलिस क्लब की जर्जर इमारत में उन्हें नींद नहीं आती। अंग्रेजों की जमाने में बनी यह इमारत अब बेहद जर्जर हो गई है। सालों से पुताई न होने से बाहर से यह ‘भुतहा घर’ नजर आ रही है। दरकीं दीवारें और जगह-जगह उखड़े प्लास्टर के बीच दरोगाओं की खाट बिछी हुई है।
अपर एसपी आवास और महिला थाने के नजदीक बना पुलिस क्लब बहुत पुराना है। इसमें 5 कमरे और 3 बड़े हाल हैं। विभिन्न थाना-चौकियों में तैनात दरोगा और इंस्पेक्टर यहां रहते हैं। दो कमरे स्टोर के नाम पर कबाड़ से भरे हैं। आधुनिक सुविधाओं का यहां नामोनिशान नहीं है। मनोरंजन के लिए साधन तो दूर रोजमर्रा की जरूरत वाले सामान भी नहीं हैं। फालोवर छुट्टी पर चला जाए तो होटल या खुद बनाकर खाना मजबूरी है। बिजली के खुले तार कभी भी दुर्घटना कर सकते हैं। दीवारों और छत की परत हर साल उधड़ रही है। बारिश में छत टपकने से नींद हराम हो जाती है। यहां का सरकारी टीवी महीनों से खराब है।
पुलिस क्लब में रहने वाले हर दरोगा से मेंटेनेंस के नाम पर 15 रुपये हर माह लिए जाते हैं। यह पैसा वेतन से कटता है। जितना कम पैसा उतनी कम सुविधाएं। शौकीन दरोगा अपनी जरूरत के लिए टीवी, पंखा, फ्रिज, कूलर आदि खुद लाकर रखते हैं। गर्मी में दरोगाओं को खुले मैदान में सोना पड़ता है। इस बारे में पुलिस के संबंधित अधिकारी का कहना है कि क्लब भवन काफी पुराना है। अभी पुलिस लाइन के आवासों की मरम्मत चल रही है। यहां काम निपटने के बाद पुलिस क्लब की मरम्मत भी कराई जाएगी।

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