मारा गया दस्यु रामचंद्र ही था, डीएनए जांच में पुषि्ट

Banda Updated Sun, 27 Oct 2013 05:40 AM IST
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रशीद सिद्दीकी
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बांदा। यूपी-एमपी पुलिस से सवा लाख के इनामी बदमाश रामचंद्र पटेल की मौत की गुत्थी एमपी पुलिस ने सुलझा ली है। पिछले वर्ष अक्तूबर माह में यूपी-एमपी की सरहद पर थर पहाड़ में मिला नर कंकाल दस्यु सरगना रामचंद्र पटेल का ही था। इसका खुलासा अब आई डीएनए टेस्ट रिपोर्ट से हुआ है। एमपी पुलिस दस्यु रामचंद्र के मुठभेड़ में मारे जाने का दावा कर रही है जबकि ग्रामीणों द्वारा मौत के घाट उतारे जाने की चर्चा थी।
दोनों सूबों के सीमावर्ती जिलों में वारदातें अंजाम देता रहे दस्यु रामचंद्र पर यूपी पुलिस ने 50 हजार और एमपी पुलिस ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन तिराहे पर 23 जुलाई 2007 को ठोकिया गिरोह द्वारा 6 एसटीएफ जवानों की हत्या में भी रामचंद्र पटेल भी नामजद था। फतेहगंज (बांदा) थाने में उस पर अपहरण, हत्या और जान से मारने के प्रयास के आधा दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हैं। पिछले वर्ष 28 सितंबर को मध्य प्रदेश पुलिस ने नयागांव थाना क्षेत्र के थर पहाड़ के पास रामचंद्र पटेल को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था, लेकिन फौरी तौर पर पुलिस को शव हाथ नहीं लगा। बाद में नौ दिनों बाद सात अक्तूबर को थर पहाड़ की चोटी में एमपी पुलिस ने एक क्षत-विक्षत शव बरामद किया था। शव चट्टानों के बीच घास-फूस में छिपा दिया गया था। एमपी पुलिस ने रामचंद्र पटेल की पत्नी रजुलिया को नौगांव थाना बुलाकर शव की शिनाख्त कराई थी, लेकिन पूरी तरह पहचान नहीं हो पा रही थी। पुलिस ने रामचंद्र की विवाहिता पुत्री निराशा के खून और शव की हड्डियों का नमूना लेकर डीएनए टेस्ट के लिए भेजा था। अब लगभग एक वर्ष बाद नौगांव (एमपी) पुलिस को फोरेसिंक साइंस प्रयोगशाला, सागर (एमपी) से डीएनए रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। नौगांव थानाध्यक्ष अशोक साहू ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि डीएनए रिपोर्ट पाजिटिव मिली है यानि शव रामचंद्र पटेल का ही था। एमपी पुलिस ने अपने अभिलेखों में रामचंद्र पटेल को मृतक दर्ज कर लिया है। यूपी पुलिस भी डीएनए रिपोर्ट मिलने के बाद अपने यहां उसकी मौत दर्ज करेगी।
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पिता की हत्या के बाद पकड़ी थी बंदूक
बांदा। दस्यु सरगना रामचंद्र पटेल की मौत की पुष्टि के बाद यूपी-एमपी के सीमावर्ती गांवों में एक खतरनाक दस्यु सरगना के आतंक का अध्याय खत्म हो गया। लोगों ने राहत महसूस की है। रामचंद्र पटेल बागी जीवन से पहले चरवाहा था। इसी दौरान जंगल में उसकी दोस्ती कुछ डकैतों से हो गई। वर्ष 2004 में गांव के कुछ लोगों ने रामचंद्र पटेल के पिता की गोली मारकर हत्या कर दी। बस, इसी के बाद रामचंद्र ने बीहड़ की राह पकड़ ली। शुरूआत में वह अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया के साथ रहा। बगहिया पुरवा, बिछियन पुरवा और एसटीएफ जवानों की सामूहिक हत्या जैसे मामलों में भी उसका नाम था। ठोकिया के मारे जाने के बाद रामचंद्र सुंदर पटेल उर्फ रागिया के साथ हो गया। रागिया के मारे जाने के बाद रामचंद्र ने खुद का गिरोह बना लिया। (सत्येंद्र श्रीवास्तव)
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