आठ बरस का आरटीआई

Banda Updated Fri, 25 Oct 2013 05:41 AM IST
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बांदा। जनसूचना अधिकार अधिनियम (आरटीआई) आठ बरस का हो गया। 25 अक्तूबर 2005 को यह लागू हुआ था। शुक्रवार (25 अक्तूबर) को ‘जन सूचना अधिकार दिवस’ मनाया जाएगा। इस अधिनियम के तहत विभिन्न विभागों की खबर लेने वाले कुछ आरटीआई एक्टीविस्ट का कहना है कि इस महत्वपूर्ण केंद्र सरकार के अधिनियम के तमाम विभाग और अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे। लोगों में जागरूकता के लिए प्रशिक्षण की भी वकालत की।
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आरटीआई एक्टीविस्ट आशीष सागर का कहना है कि बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्रों के लिए यह अधिनियम काफी कारगर होता। बशर्ते इसका पालन सही किया जाता। जिला स्तर पर अधिकारी सूचना नहीं देते। देते भी हैं तो गोलमोल या आधी-अधूरी। राज्य सूचना आयोग में छह-छह माह तक सुनवाई नहीं होती। सिर्फ बांदा के 800 मामले राज्य आयोग में लंबित हैं। आशीष सागर ने 2007 से अब तक लगभग 650 आवेदन डाले हैं। कुछेक को छोड़कर ज्यादातर की जानकारी पूरी नहीं मिली। सूचना आयुक्त के रूप में राजनीतिक लोग नामित कर दिए जाते हैं।
एक अन्य आरटीआई एक्टीविस्ट कुलदीप शुक्ला अब तक 600 सूचनाएं विभिन्न विभागों से मांग चुके हैं। बोले, 60 सूचनाएं आज तक नहीं मिली। पहली सूचना 24 अगस्त 2007 को कचहरी रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज निर्माण की मांगी थी। यह भी बोले, इस कानून से भ्रष्टाचार पर वार हो सकता है, लेकिन अभी यह अधिकार अपना व्यापक रूप नहीं ले पाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर लोग इससे अनभिज्ञ हैं। उन्हें सक्रिय और जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण जैसी कोई व्यवस्था की जानी चाहिए।
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