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डूडा में बजट है पर खर्च करने वाला नहीं

Banda Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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बांदा। नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) स्वरोजगार, प्रशिक्षण, नगरीय मजदूरी समेत विभिन्न मदों के लिए आए 46 लाख रुपए खर्च नहीं कर सका। वित्तीय वर्ष खत्म होने में महज दो माह से भी कम है और 32 लाख रुपए डूडा के खाते में हैं। पूरे वर्ष में 29 लाख रुपए व्यय हुए हैं। विभाग में स्टाफ की कमी से योजनाओं को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।
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वित्तीय वर्ष 2012-13 में शासन से मिले 46 लाख 8 हजार रुपए में विभाग महज 29 लाख 4 रुपए ही खर्च कर सका है। डूडा में अभी 32 लाख 4 हजार रुपए अवशेष हैं। युवक व युवतियों के स्टेप अप प्रशिक्षण के लिए 2 लाख 66 हजार रुपए आए, लेकिन इसमें 53 हजार रुपए खर्च हुए। दो लाख 13 हजार अवशेष हैं। स्वरोजगार के मद में आए 16 लाख 58 हजार में एक भी रुपए खर्च नहीं किए गए।

थ्रिप्ट एंड क्रेडिट सोसायटी के तहत गरीब महिलाओं का समूह बनाया जाता है। समूह की महिलाएं बचत कर रोजगार के लिए पैसा जमा करती हैं। कुछ विभाग अनुदान देता है। इस मद में आई धनराशि 12 लाख 7 हजार रुपए में 7 लाख 1000 रुपए व्यय हुए। 5 लाख छह हजार रुपए डंप हैं। नगरीय मजदूरी के तहत शहर में मलिन बस्तियों में नाली, खड़ंजा आदि के लिए 2 लाख 14 हजार रुपए स्वीकृत हुए। यह पूरे अवशेष हैं। डवाकुवा योजना के बारे में किसी को कोई जानकारी ही नहीं हैं। जबकि इस योजना के तहत शहर में रहने वाली शिक्षित महिलाओं के सामाजिक व आर्थिक उत्थान के लिए विभाग समूह गठित कराता है। मोमबत्ती, लिफाफा आदि लघु उद्योगों के लिए अनुदान पर ऋण दिया जाता है। शासन से इस योजना के लिए 4 लाख 62 हजार रुपए आए, एक भी रुपए का उपभोग नहीं हुआ। प्रशासनिक मद (एससीएस) में आई 8 लाख एक हजार की रकम जरूर पार लगा दी गई। इसमें वेतन आदि में 6 लाख रुपए खर्च हुए। महज डेढ़ लाख रुपए अवशेष हैं। डूडा में परियोजना अधिकारी से लेकर चपरासी तक के सृजित सात पद में छह खाली हैं। एकमात्र पत्रवाहक बाबू है तो वह महज सूचनाएं तैयार करने में पूरा समय खपा देता है।


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