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अफजल को फांसी : देर आए, दुरुस्त आए

Banda Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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बांदा। संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु को फांसी देने को सरकार का देर से पर सही कदम बताया गया है। यह भी कहा जा रहा है कि ‘देर आए दुरुस्त आए’। डाक्टर, व्यापारी, शिक्षक, समाजसेवी, अधिवक्ता और राजनीतिज्ञों ने इसे देश हित में की गई कार्रवाई करार दिया।
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राजकीय महिला डिग्री कालेज प्राचार्य प्रभा श्रीवास्तव ने कहा कि देश सर्वोपरि है। जिस श्रेणी का अपराध हो, उसी श्रेणी की कठोर सजा होनी चाहिए। संसद पर हमला बेहद गंभीर अपराध था। इसमें दोषी लोगों को फांसी दिया जाना जायज है। व्यापारी और सर्राफा एसोसिएशन महामंत्री सत्यप्रकाश सर्राफ ने कहा कि अफजल गुरु को यह सजा बहुत पहले ही दे दी जानी चाहिए थी। राष्ट्रहित से बड़ा कोई हित नहीं है। कसाब और उसके दो माह बाद ही अफजल को फांसी दिए जाने से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा मैसेज जाएगा। केंद्र सरकार का यह सराहनीय फैसला है।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. प्रज्ञा प्रकाश ने कहा कि देश पर हमला करने वालों के लिए फांसी की सजा ठीक है। अभी कई और आतंकवादी जेलों में हैं। उन पर ही देश का पैसा खर्च हो रहा है। प्रक्रिया सरल करके उन्हें भी फांसी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सजा सार्वजनिक करने में अब कोई समस्या नहीं है। देश का हर नागरिक आतंकवाद के बारे में जानने लगा है। हर समुदाय अमन-चैन चाहता है। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक दीक्षित ने कहा कि कानून ने अपना काम किया है। संसद पर हमले की कार्रवाई में कई जवान शहीद हुए थे। इतना जघन्य अपराध करने वालों को कानून की नजर में फांसी ही निर्धारित हो। केंद्र सरकार ने देश की सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम बहुत लेट-लतीफ उठाया।

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