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ठंड से जानें गईं, जा भी रही हैं पर अभिलेख ‘कोरे’

Banda Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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सत्येंद्र श्रीवास्तव
बांदा। पिछले कई सालों में कड़ाके की ठंड से दर्जनों जानें जा चुकी हैं। इस साल भी सिर्फ एक पखवारे में ठंड से मरने वालों का आंकड़ा एक दर्जन पार होने को है लेकिन प्रशासन के अभिलेख ‘कोरे’ हैं। इनमें पिछले सात वर्षों से ठंड से हुई किसी मौत का भी लेखा-जोखा नहीं है। ऐसे में किसी को भी मौत का मुआवजा भी नहीं दिया गया। उधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी ठंड से मौत का खुलासा नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में मृतक का बिसरा सुरक्षित रख लिया जाता है।
ठंड से मरने पर मृतक के आश्रितों को प्रशासन से आर्थिक मदद दिए जाने का प्रावधान है। दैवीय आपदा से मौत होने पर मृतक के परिवार को राज्य आपदा मोचन निधि और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि से डेढ़ लाख रुपए अनुग्रह राशि दी जाती है लेकिन यह तभी संभव है जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की स्पष्ट वजह दर्शाई जाए। जिला अस्पताल के चिकित्सक डा.करन राजपूत और डा.विनीत सचान का कहना है कि ठंड लगने से शरीर का कोई अंग फेल हो जाता है लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मरने का कारण ठंड बता पाना मुश्किल होता है। ठंड से धमनियों में खून जमने से हार्ट अटैक, फेफड़े में खून के थक्के और ब्रेन हैंब्रेज भी हो सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यही कारण दर्ज किए जाते हैं लेकिन ठंड से मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के प्रारूप में ऐसा कोई कालम नहीं है जिसमें मौत की वजह ठंड दर्ज की जा सके। डाक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में मृतक का बिसरा सुरक्षित कर लिया जाता है। डाक्टरों ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में किसी ने ठंड से मौत के मामले में क्लेम नहीं किया है। न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट मांगी गई है। बगैर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्शाए ठंड से मरने वाले को आपदा निधि से आर्थिक सहायता नहीं दी जाती।
इस संबंध में उप जिलाधिकारी सदर गिरीश कुमार शर्मा का कहना है कि मृतक का पोस्टमार्टम जरूरी है। अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण ठंड पाया गया तो मृतक के आश्रित मुआवजे के हकदार होंगे। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रारूप में ‘काज आफ डेथ’ (मृत्यु का कारण) ठंड से मौत होना दर्शाया जाना चाहिए। एसडीएम का कहना है कि यदि कोई मृतक आश्रित मुआवजे के लिए क्लेम करता है तो जांच-पड़ताल के बाद पात्र पाए जाने पर मुआवजा दिया जाएगा।
उधर जिलाधिकारी कार्यालय में दैवीय आपदा पटल लिपिक कृपाराम भार्गव बताते हैं कि दैवीय आपदा से मृतक के आश्रितों को शासन से डेढ़ लाख रुपए मदद दी जाती है लेकिन पिछले लगभग सात वर्षों से किसी भी व्यक्ति को ठंड से मरने पर मुआवजा नहीं दिया गया। लिपिक के मुताबिक ऐसे किसी मामले में मुआवजे का आवेदन ही नहीं किया गया।

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