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कहीं नई एंबुलेंसों का भी हश्र पुरानी जैसा न हो जाए

Banda Updated Thu, 27 Dec 2012 05:30 AM IST
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बांदा। समाजवादी स्वास्थ्य सेवा योजना में जनपद को मुहैया कराई गई 10 नई एंबुलेंस का भी वही हश्र न हो, जो पिछली एंबुलेंस का हुआ। यह बात आम लोगों के दिलो दिमाग में कौंध रही है। पिछली बार की जहां कुछ एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के कब्जे में हैं, वहीं कई कबाड़ बनकर खड़ी हैं।
प्रदेश सरकार ने एनआरएचएम योजना से बांदा जनपद को हाल ही में 10 एंबुलेंस उपलब्ध कराई है। 108 टेलीफोन नंबर डायल करके इन एंबुलेंस की सेवाएं ली जा सकती हैं। ये एंबुलेंस बांदा जिला अस्पताल सहित अतर्रा, महुआ, मटौंध, नरैनी, बबेरू, पैलानी, कमासिन, ओरन और तिंदवारी स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि टेलीफोन पर सूचना देने पर 30 मिनट के अंदर एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंच जाएगी। इसका समूचा कंट्रोल लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम से है। दूसरी तरफ आम लोगों में इस बात की चर्चा है कि प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में जनपद के लिए उपलब्ध कराई गई एंबुलेंस सेवा जैसा इनका भी हश्र न हो। इसी वर्ष यहां शासन ने सात एंबुलेंस आवंटित की थीं। ये तो चल रही हैं, लेकिन इनके पूर्व में मिली 12 एंबुलेंस पूरी तरह कबाड़ बन चुकी हैं, जो सीएमओ कार्यालय और आवास में खड़ी हुई हैं। इन्हें नीलाम किया जाना है। सीएमओ डा. आरएस वर्मा खुद स्वीकारते हैं कि अधिकांश एंबुलेंस कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। इस वर्ष मिलीं सात एंबुलेंस जिला महिला चिकित्सालय, तिंदवारी, जसपुरा, बिसंडा, महुआ, अतर्रा व नरैनी स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध हैं। हालांकि इनका लाभ मरीजों को कम स्वास्थ्य केंद्रों के डाक्टरों को ज्यादा मिल रहा है। वही इसमें बैठकर फर्राटे भर रहे हैं।

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