बुंदेलखंड में मनरेगा पर खर्च हो रहे तीन अरब सालाना

Banda Updated Tue, 25 Dec 2012 05:30 AM IST
बांदा। बदहाल बुंदेलखंड में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मनरेगा योजना भी कुछ गुल नहीं खिला पा रही। इस योजना में औसतन हर साल तकरीबन तीन अरब रुपए खर्च हो रहे हैं, लेकिन योजना लागू होने के सात साल बाद भी बुंदेलखंड के गांवों की हालत में खास सुधार नहीं आ रहा। मजदूरों का पलायन भी नहीं थमा है। इस साल अब तक बुंदेलखंड में इस योजना से 157 करोड़ रुपए से ज्यादा खपाए जा चुके हैं।
केंद्र सरकार की मंशा थी कि रोजगार गारंटी एक्ट के जरिये हरेक गांव में मजदूरों को काम सुनिश्चित होगा। गांव के विकास कार्य भी ढर्रे पर आएंगे। इस योजना में बजट भी भारी-भरकम रखा गया। बुंदेलखंड को भी भरपूर बजट मिल रहा है, लेकिन सरकार की मंशा पूरी होती नजर नहीं आ रही। इस योजना का भी वही हश्र हो रहा जो सरकार की अन्य योजनाओं का हुआ। अरबों रुपए खर्च हो जाने के बाद भी विकास की क्रांति और मजदूरों का पलायन नहीं थमा है। चालू वित्तीय 2012-13 में बुंदेलखंड के सातों जनपदों में अब तक एक अरब 57 करोड़ 69 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसमें एक अरब 7 करोड़ रुपए मजदूरी पर और 38 करोड़ 33 लाख रुपए मैटेरियल पर खर्च हुए हैं। एक करोड़ से ज्यादा रुपए प्रशासनिक खर्च के नाम पर खपाए गए हैं। मजदूरी पर 74 फीसदी और सामग्री पर 26 फीसदी खर्च किया गया है, लेकिन हरेक गांव में मजदूरी के लिए महानगरों को पलायन हुआ है। लाखों बुंदेलखंडी मजदूर देश के विभिन्न महानगरों में मजदूरी कर रहे हैं।
बांदा जनपद में 28 करोड़ 2 लाख, चित्रकूट में 15 करोड़ 3 लाख, हमीरपुर में 19 करोड़ 14 लाख, महोबा में 8 करोड़ 51 लाख, जालौन में 33 करोड़ 57 लाख, झांसी में 29 करोड़ 94 लाख और ललितपुर में 23 करोड़ 35 लाख रुपए खर्च हुए हैं। बांदा में मजदूरी पर 19 करोड़ 42 लाख और मैटेरियल पर 7 करोड़ 55 लाख, चित्रकूट में मजदूरी पर 11करोड़ 19 लाख, मैटेरियल पर 2 करोड़ 89 लाख, हमीरपुर में मजदूरी पर 14 करोड़ 17 लाख, मैटेरियरल पर 3 करोड़ 94 लाख, महोबा में मजदूरी पर 7 करोड़ 26 लाख, सामग्री पर 58 लाख, जालौन में मजदूरी पर 23 करोड़ 79 लाख, मैटेरियल पर 9 करोड़ 16 लाख, झांसी में मजदूरी पर 22 करोड़ 45 लाख, सामाग्री पर 5 करोड़ 80 लाख और ललितपुर में मजदूरी 14 करोड़ 44 लाख, सामग्री पर 7 करोड़ 48 लाख रुपए खर्च हुए हैं।
अखिल भारतीय बुंदेलखंड विकास मंच महासचिव नसीर अहमद सिद्दीकी ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इतनी भारी-भरकम बजट खप जाने के बाद भी बुंदेलखंड में बेरोजगारी और पलायन की समस्या जस की तस है। उन्होंने कहा कि इसकी मुख्य वजह भ्रष्टाचार है।

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