पुराने ढर्रे पर लौटने लगे टैक्सी स्टैंड के वाहन

Banda Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
बांदा। प्राइवेट और डग्गामार वाहन राहगीरों के लिए भले ही रोड़ा बन रहे हों पर पुलिस के लिए ‘कामधेनु’ से कम नहीं हैं। शहर से सवारियों ढोने वाले करीब 630 टेंपों, ऑटो व महेंद्रा पिकअप वाहनों से हर माह लाखों रुपए का वारा-न्यारा हो रहा है। कई टेंपो चालकों आदि ने पुलिस पर वसूली के आरोप लगाए। लोगों का कहना है कि जाम से निजात पाने को प्रशासन ने भले टैक्सी स्टैंड शहर से बाहर कर दिए लेकिन पुलिस की अकर्मण्यता की वजह से प्राइवेट वाहनों की धमाचौकड़ी में कोई कमी नहीं आई। मुट्ठी गर्म कर वे बेधड़क वाहन चला रहे हैं।
गौरतलब है कि जिलाधिकारी जीएस नवीन कुमार के आदेश पर प्रशासन ने करीब पखवारे भर शहर में अतिक्रमण अभियान चलाया। ट्रैफिक के लिए परेशानी का सबब बने अवैध टैक्सी स्टैंडों को शहर से खदेड़ दिया गया। जाम से निजात मिली तो गांव-देहात से आने वाले लोग व शहरवासियों ने भारी सकून महसूस किया लेकिन प्रशासन की यह कवायद 24 घंटे बाद ही बेअसर हो गई। टेंपो और वाहन फिर अपने पुराने अड्डों पर खड़े होकर जाम की समस्या पैदा करने लगे हैं। आरटीओ विभाग के आंकड़ों की मानें तो शहर से इस समय 630 आटो, टेंपों व टैक्सी सवारियां ढो रही हैं। इसके अलावा जीप, महेंद्रा पिकअप व बसों की भी संख्या सैकड़ा के ऊपर है। बाबूलाल चौराहा में अतर्रा व नरैनी रोड पर करीब 126 प्राइवेट वाहन प्रतिदिन चलते हैं। एक टेंपों चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वाहनों चालकों को हर माह एक बंधी रकम देनी होती है। इसके अलावा हर फेरे में अलग वसूली होती है। अब वाहनों के जमावड़े के बजाए दोनों रूट के एक-एक वाहन लगाकर बाबूलाल चौराहे से सवारियां ढोई जा रही हैं।
उधर, संकट मोचन मंदिर के सामने भी मौदहा, मटौंध, कबरई व महोबा के लिए करीब 200 प्राइवेट वाहन लगे हैं। यहां तो बाकायदा एक गुर्गा नियुक्त है। मौदहा रूट के पिकअप चालक ने बताया कि उन्हें 20 रुपए प्रति फेरा के अलावा तीन-तीन सौ तीन जगह यानी नौ सौ रुपए हर माह देना पड़ता है। यह वसूली गुर्गा ही करता है। चिल्ला चौराहा व कालूकुआं में भी कमोवेश यही स्थिति है।

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