गले की फांस बनी धान खरीद योजना

Banda Updated Mon, 10 Dec 2012 05:30 AM IST
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बांदा। सरकारी धान खरीद केंद्रों पर बिचौलियों को रोकने के लिए प्रशासन की पहल किसानों के गले की फांस बन गई है। किसानों को अलग-अलग केंद्रों से संबंद्ध किया गया है। मंडल में करीब 36 क्रय केंद्र खोलने के आदेश हैं, पर इनमें अभी तक आधे से ज्यादा नहीं खुलें है। इन केंद्रों में नामित किसान धान बेचने के लिए भटक रहे हैं।
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इस वर्ष आरएफसी व प्रशासन ने बिचौलियों पर पाबंदी लगाने के लिए नई पहल की है। मंडल में धान उत्पादन करने वाले सभी किसानों को अलग-अलग केंद्रों में संबद्ध किया जा रहा है। किस किसान के खेत में धान की कितनी उपज होती है। इसके सारे आंकड़े जुटाकर केंद्रों पर रिकार्ड के तौर पर रखा जा रहा है। प्रशासन की यह पहल किसानों के गले की फांस बन गई है। किसानों की सूची बनाने का जिम्मा लेखपालों को सौंपा गया है। लेखपाल घर बैठे मनमानी तरीके से सूची बना रहे हैं। सूची से धान उत्पादक तमाम किसानों के नाम गायब हैं। सूची में नाम न होने से उन्हें धान बेचने के लिए भटकना पड़ रहा है।
चित्रकूट मंडल में कुल 36 धान क्रय केंद्र खोलने का फरमान है। इनमें विपणन शाखा के आठ, पीसीएफ के छह, यूपी एग्रो के पांच, यूपीएसएस के आठ, एनसीसीएफ के छह व कर्मचारी कल्याण निगम के तीन सेंटर शामिल हैं। भारतीय खाद्य निगम का कोई केंद्र नहीं खुला। अभी तक महज 16 केंद्रों पर ही धान की खरीद शुरू हुई है। यूपीएसएस के आठ केंद्र में अर्जुनाह, ओरन व अतर्रा में तीन सेंटर ही चल रहे हैं। शेष पांच सेंटरों में नामित एक हजार से ऊपर किसान धान की उपज बेंचने को भटक रहे हैं। अन्य एजेंसियां बिना नाम के धान खरीदने को तैयार नहीं हैं। इसी तरह एनएनसीएफ के छह केंद्र खुलने थे, पर अभी तक नहीं खुले। एनएनसीएफ व यूपीएसएस के अधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की कमी से सेंटर नहीं खुल पा रहे हैं। मंडल में धान खरीद का लक्ष्य 22 हजार मीट्रिक टन है। लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 1500 मीट्रिक टन धान खरीद हुई है।
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