कुंभ स्नान का महत्व बताया

Banda Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
बांदा। सहस्त्रचंडी महायज्ञ के सातवें दिन श्रद्धालुओं ने यज्ञवेदियों की परिक्रमा की। साधु-संतों ने लंगर छका। श्रीमद्भागवत कथा में आतंकवाद पर चर्चा हुई। शुक्रवार को रायफल क्लब में आयोजित महायज्ञ में दिनभर परिक्रमा और काली देवी की मूर्ति व हवन यज्ञ पूजन की होड़ रही। कथावाचक ध्यानमूर्ति किशोरी (वृंदावन) ने आतंकवाद पर कहा कि संसार में मानव रूपी कंस आज भी विचरण कर रहे हैं। मनुष्य एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं। ऐसी मानसिकता व संस्कार को बदलने के लिए मनुष्य को संत की शरण में जाना होगा। महंत जोगेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि शनिवार को भंडारा के बाद समापन होगा। उधर, महायज्ञ में आए दसनाम जूना अखाड़ा महंत थानापति रवींद्रानंद सरस्वती ने कहा कि समुद्र मंथन से निकला अमृत कलश राक्षसों ने ले लिया था। विष्णु ने रूप बदल कर राक्षसों से कलश वापस लिया। भागते समय जहां-जहां अमृत की बूंदें छलक कर गिरीं उस जगह को कुंभ के रूप में जाना जाता है। मुहूर्त में स्नान करने से मनुष्य का जीवन सफल हो जाता है। ब्यूरो

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