नवंबर में सस्ते दर के राशन पर संशय

Banda Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
बांदा। एपीएल और महामाया कार्डधारकों को नवंबर में सस्ते दर के गेहूं से वंचित होना पड़ सकता है। कारण 31 अक्तूबर तक उठान का समय है, पर अभी तक एफसीआई गोदाम में इस गेहूं की रैक नहीं पहुंची है। ऐसे में गेहूं के वितरण पर संशय है।
जिले में एपीएल कार्डधारकों के हिस्से का सस्ते दर का 6500 कुंतल गेहूं का उठान होना था। इसमें दो हजार कुंतल ग्रामीण क्षेत्र का तथा 45 सौ कुंतल शहरी क्षेत्र का गेहूं शामिल है। कोटेदार हर माह 23 तारीख से खाद्यान्न का उठान शुरू कर देते हैं। इसके पूर्व विपणन विभाग से एफसीआई के गोदाम में राशन पहुंच जाता है। इस माह 29 तारीख बीत गई पर अभी तक एपीएल व महामाया का गेहूं गोदाम नहीं पहुंच सका। कोटेदार अंत्योदय व बीपीएल का राशन उठाकर ले जा रहे हैं। अब उठान की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर को महज दो दिन का समय बचा है। महामाया के लाभार्थियों को हर माह करीब 1250 कुंतल गेहूं और 850 कुंतल चावल आवंटित होता है। पर इस बार यह रैक एफसीआई गोदाम में नहीं पहुंच पाने से वितरण पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि एफसीआई के आरएमओ राजेश कुमार ने दावा किया है कि 31 अक्तूबर तक एपीएल व महामाया का गेहूं पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट की दिक्कत से राशन एफसीआई गोदाम पहुंचने में विलंब हो रहा है, जबकि जिला पूर्ति अधिकारी आनंद त्रिपाठी ने कहा कि एपीएल गेहूं के उठान में विलंब हो गया है। एफसीआई प्रबंधक ही इस बाबत सही जानकारी दे सकते हैं।

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गोदाम की घटतौली की कार्डधारकों से भरपाई
बांदा। एफसीआई गोदाम से कोटेदारों को बिना तौले ही अंदाज से गेहूं उठवाया जा रहा है। ऐसे में उन्हें हर माह दो से चार कुंतल राशन का घाटा उठाना पड़ रहा है। इसकी भरपाई कोटेदार कार्डधारकों के हिस्से से कर रहे हैं। गोदाम में राशन उठान को पहुंचे कोटेदारों गोदाम में राशन कम देने की शिकायत की। शहर में बाबा तालाब (इंदिरा नगर) के कोटेदार रामबाबू ने बताया कि हर माह उन्हें प्रति बोरी दो-तीन किलो राशन कम मिलता है। ऐसे में पूरे राशन में उन्हें तीन या चार कुंतल का घाटा उठाना पड़ता है। मरौली के कोटेदार इंद्रजीत सिंह ने बताया कि राशन कम होने की बात पर गोदाम से दो बोरी अधिक दे दी जाती है। कोटेदार रतीराम ने कहा कि एक तरफ उन्हें गोदाम से राशन कम दिया जाता है तो दूसरी तरफ जरा सी शिकायत पर पूर्ति महकमा उनकी जमानत राशि जब्त कर लेता है। रेउना-भरखरी के कोटेदार ने कहा कि उठान का सप्ताह भर का ही समय होता है। इतने समय में जिले भर के सैकड़ों कोटेदारों को राशन उठाना होता है। धर्मकांटा की व्यवस्था न होने से मजबूरी में उन्हें बिना तौलाए ही राशन ले जाना पड़ता है। बाद में तीन-चार कुंतल गेहूं व चावल कम होने पर नुकसान उठाना पड़ता है। गोदाम के बड़े बाबू जेपी यादव ने कहा कि बोरियों की लाट में दो-तीन बोरियों की तौल करा दी जाती है। उसी के मुताबिक अन्य बोरियां भी लाद दी जाती हैं। कोटेदारों को राशन कम नहीं दिया जाता।

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