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चित्रकूट में किया था श्रीराम ने पिता का श्राद्ध

Banda Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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अतर्रा। वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने पितृ पक्ष में चित्रकूट के मंदाकिनी घाट में अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध किया था। 12 वर्ष तक चित्रकूट में उन्होंने हर साल इस पखवारे में जल तर्पण किया। भगवान श्रीराम के वनवास जाते ही राजा दशरथ ने पुत्र मोह में शरीर त्याग दिया था। सबसे बड़ा पुत्र होने के नाते स्वर्गवासी पिता की श्राद्ध कर्म की जिम्मेदारी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की थी। चित्रकूट में मंदाकिनी तट पर श्रीराम ने उन्हें जल तर्पण करते हुए श्राद्ध क्रिया पूरी की। मान्यता है कि भगवान श्रीराम अभी भी पितृ पक्ष में श्राद्ध व तर्पण करने चित्रकूट अवश्य आते हैं। पितृ पक्ष में चित्रकूट का महत्व इसी वजह से और बढ़ जाता है। महर्षि वाल्मीकि ने भी अपनी रामायण में लिखा है कि पिता दशरथ की मृत्यु का समाचार मिलने पर श्रीराम पैश्वनी नदी के तट पर बैठकर रोए थे। प्राचीनकाल में महर्षि विश्वामित्र के पुत्रों ने श्राद्ध कर्म के महात्म्य से अपने पांच जन्मों के कर्मों से मुक्ति प्राप्त कर भगवान विष्णु के परम पद बैकुंठ प्राप्त किया। (मृत्युंजय द्विवेदी)
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