भू-विसर्जन के लिए आम सहमति की जरूरत

Banda Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
बांदा। मंदाकिनी और केन नदी बचाओ आंदोलन की सह संयोजक अर्चना मिश्रा ने भू-विसर्जन का खुलकर समर्थन करते हुए कहा है कि इसके लिए आम सहमति बननी चाहिए। इसी में जन कल्याण छिपा है। यही धर्म है।
प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में नवरात्र पर प्रतिमाओं की स्थापना 30-35 साल पहले शुरू हुई। तब नदियों की स्थिति वह नहीं थी जो आज है। आज नालें, लाशें और केमिकलयुक्त मूर्तियां आदि नदी में डाले जाने से नदियां प्रदूषित हो रही हैं। इन गलतियों के कारण छोटी नदियां विलुप्त हो गईं। कुछ मिटने की कगार पर हैं। इन्हीं में एक केन नदी भी है। नदियों को भी मां कहा गया है। भ्रमवश बहस की जा रही है। रामायण में देखा जाए तो सीता मां जमीन से निकलीं और अंत में सशरीर वसुंधरा की गोद में समा गईं। हजारों मूर्तियां जमीन में दफन हैं। खुदाई में निकलती हैं तो उन्हें मंदिर बनवाकर स्थापित किया जाता है और पूजा करते हैं। श्रावण और पुरुषोत्तम महीने में शिवलिंग बनाए जाते हैं। पूजा-अर्चना के बाद उन्हें जल अथवा पवित्र स्थान पर विसर्जन करने का विधान शास्त्रों में है। लोग पीपल आदि के नीचे विसर्जन करते हैं। जब शिव को भू-विसर्जन करते हैं तो शक्ति को क्यों नहीं कर सकते? ब्यूरो

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